
नई दिल्ली – रणवीर इलाहाबादिया तथा समय रैना द्वारा उनके यूट्यूब चैनल पर एक कार्यक्रम में की गई अश्लील टिप्पणियों के बारे में सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करने वाले ‘अनुच्छेद १९ (क)’ को प्रभावित किए बिना ऑनलाइन अश्लीलता प्रसार करने वाली सामग्री को नियंत्रित करने के लिए नियमावली तैयार करने के निर्देश दिए थे । उसी के अनुसार केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा ‘आईटी नियमावली २०२६’ के अंतर्गत इस प्रकार की सामग्री के लिए कारावास तथा आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है ।
हम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार इस नियमावली का प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं एवं इसे अंतिम रूप दिए जाने के बाद घोषित करेंगे , ऐसा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रवक्ताओं ने बताया ।
कौन-सी सामग्री अश्लीलता प्रसार करने वाली मानी जाएगी ?
केंद्र सरकार ने इस प्रस्तावित नियमावली के लिए ‘केबल टीवी नेटवर्क नियम १९९४’ कानून का आधार लिया है , जिसके अनुसार जो सामग्री कामुकता का प्रसार करती है , वासना को उकसाती है , परिणामस्वरूप व्यक्ति को भ्रष्ट कर सकती है , ऐसी सामग्री को अश्लील माना जाएगा ।








