सिक्ख संगठन ने प्रविष्ट की है याचिका

नई देहली – भारतीय रेल्वे में भोजन की थाली में दिए जानेवाले परोसे जानेवाले ‘झटका’ एवं ‘हलाल’ पद्धति के मांसाहारी पदार्थाें से विवाद उत्पन्न हुआ है । इस संदर्भ में सिक्ख संगठनों द्वारा प्रविष्ट याचिका के आधार पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने रेल्वे बोर्ड, एफ्.एस्.एस्.ए.आई. (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्डर्स एथॉरिटी ऑफ इंडिया – भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) एवं सांस्कृतिक मंत्रालय के सचिवों को नोटिस दिया है ।
BREAKING: NHRC flags possible human rights violations over alleged serving of only Halal meat in Indian Railways’ non-veg meals.
Commission stresses passengers’ right to know & choose (Halal/Jhatka), cites equality, religious freedom & livelihood concerns, and seeks fresh… pic.twitter.com/cyTTbSRM8s
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) January 12, 2026
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१. आयोग ने नोटिस में कहा है कि रेल्वे में केवल हलाल मांस ही दिए जाने से वह यात्रियों के अन्न के चयन के अधिकार का उल्लंघन सिद्ध हो सकता है, साथ ही यह सिक्ख धर्म की ‘रहत’ मर्यादा के (आचारसंहिता के) विरुद्ध है ।
२. आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने बताया कि सिक्ख रहत मर्यादा के अनुसार सिक्खों को हलाल मांस खाने पर प्रतिबंध है । यदि सिक्ख यात्रियों को उन्हें किस प्रकार का मांस परोसा जा रहा है, इसकी जानकारी नहीं दी जाती हो, तो वह उनके अधिकारों का सीधा हनन है ।
खाद्यसंस्थाओं को सुस्पष्ट जानकारी देने का निर्देश
आयोग ने सांस्कृतिक मंत्रालय को सभी खाद्यबिक्री केंद्रों तथा संस्थाओं को स्पष्टता से सूचना देने के लिए कहा है कि परोसा जानेवाला मांस हलाल है अथवा झटका ?, इसे स्पष्टता से दर्शाया जाए । पारदर्शिता का अभाव धार्मिक स्वतंत्रता एवं ग्राहक अधिकारें के विरुद्ध है ।
एफ.एस्.एस्.आई. को भेजे गए नोटिस में आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि मांसाहारी अन्न के प्रमाणपत्रों में परोसा गया मांस झटका है अथवा हलाल ?, इसका सुस्पष्ट उल्लेख हो ।
इस्लामी देश का ‘एतिहाद एयरलाइंस’भी यात्रियों को हलाल एवं झटका मांस परोसता है !
दारुल उलूम देवबंद के अनुसार ‘पशुबलि देनेवाले मुसलमान व्यक्ति द्वारा निकाले गए मांस को ही हलाल मांस माना जाता है । उसके कारण हिन्दू दलित समुदायों को रोजगार के अवसरों से वंचित रखा जाता है, जो पारंपरिकरूप से पशुबलि एवं मांसबिक्री से जुडे हुए हैं । ग्राहकों को ‘उन्हें किसप्रकार का मांस दिया जा रहा है, इसे जान लेने का पूरा अधिकार है । इस्लामी देश का ‘एतिहाद एयरलाइंस’ भी यात्रियों को हलाल एवं झटका इन दोनों प्रकार के भोजन का विकल्प उपलब्ध कराता है ।
‘हलाल’ एवं ‘झटका’ मांस में स्थित अंतर
हलाल मांस का अर्थ है पशुओं का मुख मक्का की दिशा में रखकर उसके गले की नस काटी जाती है तथा उन्हें तडपता हुआ मरने दिया जाता है । इसमें पशु का रक्त बडी मात्रा में बहता है । इसके विपरीत हिन्दू अथवा सिक्ख धर्माें में ‘झटका’ पद्धति से पशुओं की हत्या की जाती है । उसमें पशुओं की गर्दन एक ही वार में काटी जाने से उन्हें अल्प पीडा होती है ।








