
नई देहली – कश्मीरी हिन्दुओं के पुनर्वास के लिए कार्यरत संगठन ‘पनून कश्मीर’ (हमारा कश्मीर) की ओर से हाल ही में एक राष्ट्रीय ऑनलाइन विचारगोष्ठी का (‘वेबिनार’का) आयोजन किया गया था । देश के विभिन्न क्षेत्रों में रह रहे विस्थापित कश्मीरी हिन्दुओं के प्रमुख नेताओं ने इस विचारगोष्ठी में भाग लिया । जम्मू-कश्मीर, देहली, नोएडा, फरिदाबाद, गुरुग्राम, मुंबई इत्यादि स्थानों के कश्मीरी हिन्दू नेताओं ने इसमें भाग लिया । कश्मीरी हिन्दुओं का अस्तित्व टिकाए रखने के साथ ही घाटी के मूल नागरिकों के रूप में इस समुदाय को संगठित रखना, इन २ महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर सदस्यों में सर्वसम्मति हुई ।

उपस्थित कश्मीरी हिन्दू नेता !
इस विचारगोष्ठी में उत्पल कौल, वीरेंद्र रैना, अनुपम कौल, उपिंदर स्वरूप, उपिंदर कौल, कमल बागती, विजय हंडू, राजिंदर कौल, प्रदीप हंडू एवं आर्.के. धरसहित अन्य मान्यवर उपस्थित थे । कश्मीरी हिन्दू भाजपा के वरिष्ठ नेता अश्वनी कुमार च्रुंगू भी विशेष अतिथी एवं वक्ता के रूप में उपस्थित थे ।
विचारगोष्ठी में लिए गए निर्णय !
१. भारत सरकार के स्तर पर विस्थापित हिन्दुओं की आर्थिक सहायता में वृद्धि करने के सूत्र की समीक्षा करने का निर्णय
२. वर्ष २०२६ में कश्मीरी हिन्दू युवकों के लिए नौकरियां उपलब्ध कराना सरकार का प्राथमिक उद्देश्य होना चाहिए, यह मांग की जाएगी ।
३. कश्मीर को विशेषाधिकार प्रदान करनेवाला अनुच्छेद ३७० निरस्त हुआ, तथापि अभी तक कश्मीर घाटी में कश्मीरी हिन्दुओं के पुनर्वास का ठोस समाधान नहीं निकाला गया है । कश्मीर में वांशिक नरसंहार एवं नरसंहार करनेवालों के साथ किसी भी समझौते का प्रश्न ही नहीं आता । जो कुछ हुआ, उसे कश्मीरी हिन्दू कभी नहीं भूलेंगे अथवा क्षमा भी नहीं करेंगे । इस विचारगोष्ठी में कश्मीर के हिन्दू समुदाय के विरुद्ध हुए नरसंहार के लिए ‘विशेष आपराधिक न्यायाधिकरण’के गठन का आवाहन किया गया ।








