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बांग्लादेशी हिंदुओं के नरसंहार के विरोध में पेरिस में हजारों हिंदुओं का विशाल विरोध मार्च

पेरिस (फ्रांस): फ्रांस की राजधानी पेरिस स्थित ऐतिहासिक रिपब्लिक स्क्वेयर में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे नरसंहार के विरोध में एक भव्य और प्रभावशाली निषेध मार्च आयोजित किया गया। यह आंदोलन बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद तथा ब्यूरो ऑफ ह्यूमन राइट्स एंड जस्टिस के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

इस आंदोलन की जानकारी ‘ब्यूरो ऑफ ह्यूमन राइट्स एंड जस्टिस’ के अध्यक्ष एवं प्रखर हिंदुत्वनिष्ठ श्री दीपन मित्रा ने दी। इस अवसर पर हजारों की संख्या में प्रवासी बांग्लादेशी हिंदू एकत्रित हुए और उन्होंने बांग्लादेश का राष्ट्रगान भी गाया।

श्री मित्रा ने कहा कि बांग्लादेश में केवल धार्मिक पहचान के कारण अल्पसंख्यकों को योजनाबद्ध ढंग से समाप्त करने की प्रक्रिया चल रही है। इस गंभीर विषय पर विश्व समुदाय मौन नहीं रह सकता।

विरोध मार्च के माध्यम से रखी गई प्रमुख मांगें

  • ईशनिंदा के झूठे आरोपों के तहत दीपू चंद्र दास, खोकन दास और अमृत मंडल की क्रूर हत्या करने वालों को कठोरतम सजा दी जाए।
  • इस्कॉन के चिन्मय कृष्णदास प्रभु को बिना शर्त तत्काल रिहा किया जाए। (वे पिछले डेढ़ वर्ष से कारावास में हैं।)
  • बांग्लादेश को ‘हिंदूमुक्त’ बनाने के षड्यंत्र को तुरंत रोका जाए।

पिछले डेढ़ वर्ष में हिंदुओं पर हुए अत्याचार

इस अवसर पर हिंदुत्वनिष्ठ नेताओं ने बताया कि:

  • कम से कम 169 हिंदू शिक्षकों को जबरन इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया।
  • 187 हिंदुओं की हत्या की गई।
  • 221 हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं हुईं।
  • हजारों हिंदुओं के घरों और व्यवसायों पर हमले कर उन्हें तोड़ा-फोड़ा गया और आगजनी की गई।
  • उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश में ईशनिंदा के आरोपों के नाम पर हिंदुओं पर हमले, तथा हिंदू मठों और मंदिरों पर नियंत्रण स्थापित करने की घटनाएं अब दैनिक बन चुकी हैं। यह स्थिति गंभीर मानवाधिकार संकट की ओर संकेत करती है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप अत्यावश्यक है।

29 दिसंबर

बांग्लादेशी हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरूद्ध देशभर में विविध स्थानों पर विरोध प्रदर्शन

बांग्लादेश में हिन्दू युवक दीपू चंद्र दास की हुई क्रूरतापूर्ण हत्या के विरोध में, साथ ही इस प्रकरण में भारत सरकार ठोस नीति अपनाए, इस मांग को लेकर हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन तथा राष्ट्रप्रेमी नागरिकों द्वारा अनेक स्थानों पर आंदोलन किए गए ।

बांग्लादेश पर प्रतिबंध लगाने की उत्तर प्रदेश की हिन्दू संगठनों की मांग

वाराणसी – यहां हिन्दू जनजागृति समिति तथा अन्य हिन्दू संगठनों ने बांग्लादेश के मयमनसिंह क्षेत्र में हिन्दू युवक दीपू चंद्र दास को कट्टरपंथी भीड द्वारा पेड से बांधकर जिंदा जलाए जाने की घटना की कडी निंदा की । साथ ही बांग्लादेश में हिन्दुओं के घरों तथा दुकानों को जलाए जाने की घटनाओं का भी विरोध किया । इस पृष्ठभूमि में हिन्दुओं पर हो रही हिंसा को रोकने के लिए बांग्लादेश पर आर्थिक, व्यापारिक तथा राजनीतिक प्रतिबंध लगाए जाएं तथा वहां के आतंकवादी एवं कट्टरपंथी गुटों के खिलाफ कडी सैन्य कार्यवाही की जाए—ऐसी मांग हिन्दू संगठनों ने की ।  इन मांगों का ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा बांग्लादेश के उच्चायुक्त के नाम वाराणसी के उपजिलाधिकारी आलोक वर्मा, पिंडरा तहसील की उपजिलाधिकारी प्रतिभा मिश्रा तथा सैदपुर के संयुक्त दंडाधिकारी रामेश्वर सुधाकर को सौंपा गया । इस अवसर पर विभिन्न हिन्दू संगठनों के पदाधिकारी, कानून के जानकार (विधिज्ञ) एवं व्यवसायी उपस्थित थे ।

बंगाल के सिलीगुडी के होटलों में बांग्लादेशी नागरिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध !

पिछले एक वर्ष से बांग्लादेश में उत्पन्न हुई स्थिति को देखते हुए ‘ग्रेटर सिलीगुडी होटलियर्स वेलफेयर एसोसिएशन’ ने बांग्लादेशी नागरिकों को सिलीगुडी के होटलों में प्रवेश न देने का निर्णय लिया है । एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल वीजा (किसी देश में प्रवेश करने, देश छोडने या यात्रा करने की अनुमति देने वाला आधिकारिक दस्तावेज या मुहर) पर भारत आनेवालों को भी रहने की सुविधा नहीं दी जाएगी । एसोसिएशन के संयुक्त सचिव उज्ज्वल घोष ने यह जानकारी दी ।

मालोगांव में श्री शिवप्रतिष्ठान हिंदुस्थान द्वारा विरोध प्रदर्शन!

यहां अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें कहा गया है कि, बांग्लादेश में हिंदुओं और हिंदू धर्म पर हो रहे हमलों की घटनाएँ निंदनीय हैं। केंद्र सरकार को बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। दोनों देशों की सीमा के माध्यम से केवल हिंदुओं को सुरक्षित रूप से भारत वापस लाया जाए। साथ ही, बांग्लादेश सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

नेपाल में आक्रोश

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में हिंदुओं और संतों ने बड़ी संख्या में जनकपुरधाम में सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया। प्राचीन जनकपुर शहर के जानकी मंदिर परिसर से शुरू हुए इस विरोध मार्च में बांग्लादेश में मारे गए हिंदू युवक दीपु चंद्र दास को न्याय दिलाने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने इस घटना को “अमानवीय और धर्म के नाम पर मानवता के खिलाफ किया गया अपराध” बताया। उन्होंने अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रही हिंसा को तुरंत रोकने की मांग करते हुए नारे लगाए और बांग्लादेश का झंडा जलाया।

यह विरोध मार्च ‘रामानंदिया वैष्णव संघ’ की ओर से आयोजित किया गया था। जानकी मंदिर के उत्तराधिकारी महंत राम रोशन दास ने कहा, “मैंने नेपाल सरकार को भी चेतावनी दी है कि वह हर संभव तरीके से बांग्लादेश पर दबाव बनाए। किसी को भी दूसरे के प्राण लेने का अधिकार नहीं है।”

बजरंग दल द्‍वारा इचलकरंजी (जिल्हा कोल्हापूर) में आंदोलन

हिंदू भाई दीपु चंद्र दास की नृशंस हत्या पूरे हिंदू समाज पर किए गए हमले के समान है। इसके चलते भारत सरकार को चाहिए कि इस्लामी कट्टरपंथी बांग्लादेशी घुसपैठियों को तुरंत भारत से बाहर निकाला जाए। साथ ही, ऐसे घुसपैठियों को शरण देने वालों के खिलाफ देशद्रोह के मामले दर्ज किए जाएँ। इन मांगों को लेकर बजरंग दल की ओर से आंदोलन किया गया।

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