हत्या नफरत के कारण की गई

ढाका (बांग्लादेश) – बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की हत्या अचानक नहीं हुई थी, बल्कि सोचे-समझे षडयंत्र तथा नफरत के कारण की गई थी, यह जानकारी एक प्रत्यक्षदर्शी ने भारत के एक समाचार माध्यम को दी । दीपू चंद्र दास को मारने वाले लोग इंसान होते हुए भी शैतान बन गए थे ।
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि,
१. दीपू चंद्र दास एक मेहनती नौजवान था; लेकिन उसकी कामयाबी कुछ लोगों की आंखों में चुभ रही थी । जिन साथियों को नौकरी नहीं मिली, उन्होंने बदला लेने के लिए दीपू पर झूठा आरोप लगाया । भीड को भडकाने के लिए जानबूझकर यह अफवाह फैलाई गई कि दीपू चंद्र दास ने पैगंबर दास का अपमान किया है । बाद में पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि दीपू चंद्र दास के विरुद्ध पैगंबर का अपमान करने का कोई प्रमाण नहीं मिला ; लेकिन तब तक देर हो चुकी थी ।
२. घटना वाले दिन दीपू चंद्र दास को कारखाने के एक विभाग में बुलाया गया । वहां उनसे जबरदस्ती त्यागपत्र लिखवाया गया । उस समय न केवल कारखाने के कर्मचारी उपस्थित थे, बल्कि बाहर से आए कुछ अजनबी भी थे । इसके बाद, दीपू को कारखाने के मुख्य द्वार के बाहर खडी हिंसक भीड के सामने धकेल दिया गया । भीड पहले से ही आक्रमण करने के लिए तैयार थी ।
३. जैसे ही वह बाहर आया, भीड ने दीपू को लाठी डंडों एवं लात घूंसों से बुरी तरह से पीटा । उसके चेहरे एवं शरीर पर बार-बार मारा गया, जिससे वह खून से लथपथ हो गया ; लेकिन भीड की क्रूरता यहीं नहीं रुकी । दीपू चंद्र दास को करीब एक किलोमीटर तक घसीटा गया, जिसके बाद उसे एक पेड से बांधकर जिंदा जला दिया गया । यह सबके सामने हुआ ; किन्तु भय के कारण कोई भी उसकी सहायता के लिए आगे नहीं आ सका ।
19 दिसंबर
बांग्लादेश : ईशनिंदा के आरोप में जिहादियों की भीड ने की हिंदू युवक हत्या, शव को पेड से लटकाकर जलाया
भीड ने ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाकर शव को जलाया

बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच कट्टरपंथी ताकतें बेकाबू हो गई हैं। एक प्रमुख विरोधी नेता की मौत के बाद भड़की हिंसा ने पूरे देश को आग के हवाले कर दिया है, जिसमें अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय सबसे ज्यादा निशाने पर है। राजधानी ढाका से लेकर दूरदराज के इलाकों तक प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं की हैं, जबकि एक हिंदू युवक की बर्बर हत्या ने मानवता को शर्मसार कर दिया है।
शेख हसीना विरोधी प्रमुख नेता और ‘जुलाई विद्रोह’ के अहम चेहरे शरीफ उस्मान हादी की इलाज के दौरान मौत हो गई। वे 12 दिसंबर को चुनाव प्रचार के दौरान गोली लगने से घायल हुए थे और सिंगापुर में भर्ती थे। उनकी मौत की खबर फैलते ही देश के कई हिस्सों में उग्र प्रदर्शन शुरू हो गए। ढाका में जिहादी नारों के साथ मार्च निकाले गए, जबकि प्रमुख अखबारों के दफ्तरों में घुसकर तोड़फोड़ और आगजनी की गई। कई पत्रकार अंदर फंस गए थे, जिन्हें बाद में सुरक्षित निकाला गया। अंतरिम सरकार ने शनिवार को राष्ट्रीय शोक घोषित किया है।
Anti-Hindu Pogrom is going on in #Bangladesh
Islamists lynched a Hindu youth in #Maymensingh district and later set ablaze his dead body.
Islamists alleged that the victim Hindu youth named Dipu Chandra Das insulted their prophet Muhammad.
The incident happened around 9 PM… pic.twitter.com/woATb6D2a4
— Hindu Voice (@HinduVoice_in) December 19, 2025
भालुका में हिंदू युवक की बर्बर हत्या
हिंसा की इस आग में हिंदू समुदाय को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। जिले के भालुका इलाके में ईशनिंदा करने के आरोप में एक हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को भीड ने पीट-पीटकर मार डाला। गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले इस युवक को नग्न करके पेड़ से लटकाया गया और फिर शव को आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने घटना की पुष्टि की है, लेकिन अभी कोई केस दर्ज नहीं हुआ है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें लोग ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाते दिख रहे हैं। यह घटना गुरुवार रात की है और देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती असुरक्षा को उजागर करती है।
बढ़ती अराजकता और अल्पसंख्यक खतरे में
हादी की मौत के बाद प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर अवामी लीग से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया। ढाका में हिंदुओं को खुली धमकियां दी जा रही हैं। राजनीतिक अस्थिरता का फायदा उठाकर कट्टरपंथी तत्व सक्रिय हो गए हैं, जिससे आम चुनावों से पहले माहौल और तनावपूर्ण हो गया है।








