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पुणे में हुए सनबर्न का टैक्स अब तक नही चुकाया, फिर भी मुंबई में ‘सनबर्न’ को हरी झंडी – आखिर क्यों?

  • 7 वर्षों से वसूली बंद !

  • दंड की राशि 1 करोड रुपये से अधिक, फिर भी विभाग निष्क्रिय!

मुंबई – वर्ष 2016 में पुणे में आयोजित सनबर्न फेस्टिवल का टैक्स राज्य सरकार के राजस्व विभाग द्वारा अभी तक वसूल नहीं किया गया है। इस शुल्क को हटाने के लिए आयोजकों ने वर्ष 2017 में मुंबई उच्च न्यायालय में दो जनहित याचिकाएं दायर की थीं। बाद में आयोजकों ने वर्ष 2018 और 2019 में स्वयं ही ये याचिकाएं वापस ले लीं। इसके बाद राजस्व विभाग को कानूनन यह राशि वसूल करनी चाहिए थी, परंतु ऐसा नहीं किया गया।

आयोजकों द्वारा 42,92,085 रुपये का मुद्रांक शुल्क न भरने के कारण अब तक उन पर 69,53,121 रुपये का दंड लगाया गया है। यानी कुल राशि लगभग 1,12,45,206 रुपये हो चुकी है; परंतु यह रकम वसूले बिना ही सरकार ने इस साल मुंबई में होने वाले सनबर्न फेस्टिवल को अनुमति दे दी है। यह जानकारी ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि श्री. प्रीतम नाचणकर को राजस्व विभाग द्वारा पत्र के माध्यम से मिली।

खनिज राजस्व भी बकाया !

इसी आयोजन पर तहसील कार्यालय ने 60,55,383 रुपये भूमि उपयोग शुल्क लगाया था। वर्ष 2017 में तत्कालीन राजस्व मंत्री ने विधानसभा में इसे वसूल करने का आश्वासन दिया था; परंतु वर्ष 2019 में आयोजकों ने इसे रद्द करने हेतु प्रांताधिकारी कार्यालय में आवेदन किया और मात्र 3 दिनों में शुल्क माफ कर दिया गया। प्रशासन इस निर्णय के विरुद्ध सत्र न्यायालय में भी नहीं गया।

उच्च न्यायालय में मामला गया, फिर भी वसूली नहीं !

वर्ष 2016 में निर्धारित टैक्स के विरुद्ध आयोजकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, परंतु याचिका वापस लेने के बावजूद विभाग ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर प्रति माह 2% की दर से बढ़ते दंड के चलते राशि लाखों तक पहुंच चुकी है।


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गोवा में भी यही कहानी — करोड़ों की टैक्स चोरी !

सनबर्न फेस्टिवल के आयोजकों ने वर्ष 2009, 2014 और 2020 में गोवा सरकार के 6 करोड़ 29 लाख रुपये के टैक्स का भुगतान भी नहीं किया था। इसके चलते हाईकोर्ट ने सितंबर 2025 में 1 करोड़ 10 लाख रुपये की जमानत राशि जब्त करने का आदेश दिया था।

इसके बावजूद महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई में 19–21 दिसंबर 2025 के लिए आयोजित सनबर्न फेस्टिवल को अनुमति दे दी है।

जनता अब यह सवाल पूछ रही है — इतने बड़े वित्तीय घोटाले और बकाया के बाद भी यह अनुमति कैसे दी गई?

“शुल्क जबरन वसूला जाएगा” — मुद्रांक विभाग का जवाब

“महाराष्ट्र मुद्रांक अधिनियम की धारा 46 के अंतर्गत आयोजकों से शुल्क की जबरन वसूली की प्रक्रिया चालू है।” परंतु वास्तविकता यह है कि न्यायालय के आदेश को 7 वर्ष बीत चुके हैं, फिर भी कोई वास्तविक कदम नहीं उठाया गया है।

अब प्रश्न यह है — जो वसूली सात वर्ष में नहीं हुई, क्या अब वास्तव में होगी?

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