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गिरनार में गुरु गोरक्षनाथ की मूर्ति की विटंबना; दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग !

समस्त हिन्दू समाज की ओर से जिलाधिकारी से ज्ञापन द्वारा मांग !

निवासी जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए (दाएं से) सर्वश्री दादा जपकर, गोकुल आठरे, बापू ठाणगे, दत्ता वामन, सुनील शिंदे
निवासी जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए (दाएं से) सर्वश्री दादा जपकर, गोकुल आठरे, बापू ठाणगे, दत्ता वामन, सुनील शिंदे

अहिल्यानगर (अहमदनगर) – दत्तभक्तों के आराध्य तीर्थक्षेत्र गिरनार पर्वत स्थित गोरक्षनाथ की मूर्ति की अज्ञात समाजकंटकों द्वारा तोड-फोड कर, हिन्दू धर्मियों की भावनाओं पर तीव्र आघात किया गया है । इस घटना का निषेध करनेवाला ज्ञापन समस्त हिन्दू समाज की ओर से निवासी जिलाधिकारी दादासाहेब गीते को दिया गया ।

इस अवसर पर श्री शिवप्रतिष्ठान हिन्दुस्तान के जिलाप्रमुख बापू ठाणगे, ‘गुरु गोरक्षनाथ प्रतिष्ठान’ के गोकुल (नाना) आठरे, मच्छिंद्रनाथ अस्थाना के दादा जपकर (नाथों के स्थानों को ‘अस्थाना’ कहते हैं), छावा संगठन के श्री. दत्ता वामन, सर्जेपुरा स्थित गोरक्षनाथ थाने के नाथभक्त, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के सुनील शिंदे, दत्त देवस्थान के संजय जोशी आदि सहित जिले भर से आए असंख्य नाथभक्त और दत्तभक्त बडी  संख्या में उपस्थित थे ।

इस अवसर पर नाथभक्तों की ओर से ठाणगे ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं । उन्होंने कहा कि ४ अक्टूबर की मध्यरात्रि को अज्ञात समाजकंटकों ने गोरक्षनाथ की मूर्ति खंडित करके नाथ संप्रदाय, दत्तभक्त परिवार और समस्त हिन्दुओं की श्रद्धाओं पर तीव्र आघात किया है । इस मूर्ति को अत्यंत क्रूरता से तोडा गया है, जिससे इन समाजकंटकों की हिन्दू धर्म और मूर्तिपूजा के प्रति तीव्र घृणा दिखाई देती है ।

उन्होंने आगे कहा कि हिन्दू धर्मियों की मूर्तियों को तोडना, विभिन्न शोभायात्राओं पर पथराव करके आतंक पैदा करना, मंदिरों की भूमि हडपना — ऐसे प्रकार बार-बार पूरे देश में हो रहे हैं । प्रशासन को इस घटना को गंभीरता से लेना चाहिए और इस प्रकरण की जडें खोदकर यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कठोर कार्रवाई करनी चाहिए कि ऐसे प्रकरण की पुनर्रावृत्ति न हो । उन्होंने यह भी बताया कि इस संदर्भ में शीघ्र ही जिले भर के नाथभक्तों की एक संयुक्त सभा नगर शहर में आयोजित की जाएगी ।

‘गुरु गोरक्षनाथ प्रतिष्ठान’ के आठरे, ‘मच्छिंद्रनाथ अस्थाना’ के जपकर और छावा संगठन के श्री. दत्ता वामन ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए प्रशासन को इन समाजकंटकों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए ।

संपादकीय भूमिका :

ऐसी मांग क्यों करनी पडती है ? क्या यह पुलिस और प्रशासन को समझ में नहीं आता ?

 


गुजरात के गिरनार पर्वत पर गोरक्षनाथ मंदिर में तोडफोड, मूर्ति का विखंडन (तोडफोड) !

७ अक्टूबर २०२५

भक्तों ने व्यक्त किया रोष !

(उक्त चित्र प्रकाशित करने का उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाएं आहत करना नहीं है । केवल जानकारी के लिए प्रकाशित किया गया है । – संपादक)

कर्णावती (गुजरात) – राज्य के जूनागढ जिले में गिरनार पर्वत पर स्थित गोरक्षनाथ मंदिर में अज्ञात व्यक्तियों ने तोडफोड की । इस संत संगमरमर की मूर्ति का सिर तोड दिया गया । मंदिर के शीशे के दरवाजे सहित अन्य वस्तुओं को भी क्षति पहुंचाई गयी है । स्थानीय पुलिस ने जानकारी दी है कि यह घटना ४ अक्टूबर की देर रात घटी । इस घटना पर भक्तों ने तीव्र रोष व्यक्त किया है तथा आरोपियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है ।

१. गुजरात में गिरनार पर्वत भगवान दत्तात्रेय एवं गोरक्षनाथ के स्थान के लिए प्रसिद्ध है । गोरक्षनाथ नाथ संप्रदाय के संस्थापक हैं १११७ (एक सहस्र एक सौ सत्रह) मीटर ऊंची चोटी पर स्थित गोरक्षनाथ मंदिर में हुई इस तोडफोड पर भक्तों में भारी रोष है ।

२. जूनागढ के पुलिस अधीक्षक सुबोध ओडेदरा ने बताया कि गिरनार पर्वत पर मंदिर में गुरु गोरक्षनाथ की मूर्ति को तोडा गया है । परिवाद मिलने के उपरांत पुलिस ने जांच आरंभ कर दी है ।

३. इस पर्वत को ‘रेवतक पर्वत’ भी कहते हैं । इस पर जैनों सहित कई हिन्दू मंदिर हैं । भक्तों को चोटी तक पहुंचने के लिए १०,००० पत्थर की सीढियां चढनी पडती हैं । देवी अंबामाता का प्रसिद्ध मंदिर भी यहां के मंदिरों में समाहित है ।

संपादकीय भूमिका

हिन्दुओं के मंदिरों पर प्रतिदिन आक्रमण होते रहने पर भी हिन्दू केवल रोष व्यक्त करते हैं, आंदोलन करते हैं तथा चुप बैठ जाते हैं । यदि मुसलमानों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, तो ‘सर तन से जुदा’ के नारों के साथ (सिर काटने की धमकी) देशभर में हिंसा की जाती है । ‘आई लव मोहम्मद’ का वर्तमान प्रकरण देखिए । इसलिए, यदि कोई कहे कि हिन्दू धर्म की इस दुर्दशा के लिए भारतभर के हिन्दू एवं उनके संगठन ही उत्तरदायी हैं, तो इसमें क्या अयोग्य है ? अब तो कम से कम हिन्दुओं से संगठित होकर आवाज उठाने की अपेक्षा है !

सन्दर्भ : सनातन प्रभात 

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