संपत्ति नहीं होने के नाम पर कार्रवाई रोकना निंदनीय

मुंबई – 11 अगस्त 2012 को मुंबई के आज़ाद मैदान में हुआ दंगा महाराष्ट्र के इतिहास का एक काला अध्याय है। ‘अमर जवान ज्योति’ का अपमान, पुलिस और मीडिया की गाड़ियों को जलाना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना, महिला पुलिसकर्मियों और पत्रकारों पर हमले जैसी अनेक गंभीर घटनाएं इस दौरान हुईं। करोड़ों की हानि होने के बावजूद प्रशासन ने केवल 36.44 लाख रुपयो की क्षति दर्शाई। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि आरोपियों के पास संपत्ति नहीं होने के कारण भरपाई की प्रक्रिया रोक दी गई है। यह चिंता का विषय है ।
दंगों को 13 वर्ष बीत चुके हैं, फिर भी दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि आरोपियों के पास संपत्ति नहीं है, तो कानून के अनुसार उन पर दीवानी मुकदमे दर्ज कर सजा दी जानी चाहिए। साथ ही, इस रैली के मुख्य आयोजक रज़ा अकादमी से पूरी हानि की वसूली की जानी चाहिए। यह ठोस मांग हिंदू जनजागृति समिति ने मुंबई के सह पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) श्री सत्यनारायण चौधरी को की है।
मुंबई के दादर में होनेवाले आंदोलन की अनुमति न मिलने के बाद हिंदू जनजागृति समिति के श्री सतीश सोनार, भूमिपुत्र सामाजिक संस्था के श्री सुभाष अहीर, बॉम्बे हाईकोर्ट के अधिवक्ता श्री प्रसाद संकपाळ, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के श्री विलास निकम और सनातन संस्था की सौ. धनश्री केळशीकर ने यह ज्ञापन साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत किया। यह मांग केंद्रीय गृहमंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, गृह राज्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक को भी भेजी गई है।
2012 में म्यांमार की घटना के बहाने मुंबई में बड़ा दंगा भड़काया गया था। इसमें घायल हुए पुलिसकर्मी संतोष हांडे की अगले वर्ष मृत्यु हो गई। रज़ा अकादमी और संबंधित संगठनों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत अपराध दर्ज किया जाना चाहिए था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामले में नामित 60 आरोपी मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे के निवासी हैं, जिनमें से कई अब उपलब्ध नहीं हैं या उन्होंने अपनी संपत्ति अन्य के नाम कर दी है जिससे वसूली टाल दी गई यह अत्यंत गंभीर है। साथ ही महिला पुलिसों पर हुए हमलों की सुनवाई तत्काल कर दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। 13 वर्षों में कोई कार्रवाई न होना आश्चर्यजनक है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने रमज़ान ईद के समय मुस्लिम तुष्टिकरण हेतु कार्रवाई टाली गयी । अब कम से कम वर्तमान सरकार को राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठकर न्यायपूर्ण और कठोर कदम उठाकर पुलिस का मनोबल बढ़ाना चाहिए।








