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मेरे विरुद्ध गंभीर धोखाधडी तथा अपकीर्ति करने का षड्यंत्र – सुनील घनवट, हिन्दू जनजागृति समिति

घनवट के नाम से प्रधानमंत्री कार्यालय में की गई फर्जी शिकायत के विरुद्ध रायपुर में पत्रकार परिषद

पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए बाईं ओर से सर्वश्री अंकित द्विवेदी, सुबोध राठी, सुनील घनवट, अमित चिमनानी, विशाल ताम्रकार एवं आशिष परेडा

रायपुर (छत्तीसगड) – हिन्दू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्य संगठक श्री. सुनील घनवट ने एक गंभीर आपराधिक प्रकरण का रहस्योद्घाटन करते हुए बताया कि उनके नाम से एक फर्जी शिकायतपत्र (पत्र क्रमांक/२०२५/अ-०१८७) २५ अप्रैल २०२५ को प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा गया । इस शिकायत में श्री. घनवट का नाम, पद तथा ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, महाराष्ट्र प्रदेश’ नाम के फर्जी ‘लेटरहेड’ का उपयोग कर उस पर ‘श्री. सुनील घनवट, प्रांत संघचालक’ लिखा गया है । श्री. घनवट ने स्वयं यहां पत्रकार वार्ता कर यह स्पष्ट किया कि इस माध्यम से योजनाबद्ध पद्धति से मेरी अपकीर्ति करने का षड्यंत्र रचा गया ।

इस पत्रकार वार्ता में व्यासपीठ पर रामभक्त सेना के छत्तीसगढ प्रांत संयोजक विक्रम केवलानी, गोरक्षक अंकित द्विवेदी एवं सुबोध राठी, भाजपा के छत्तीसगढ प्रदेश माध्यमप्रमुख अमित चिमनानी, अंतरराष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विशाल ताम्रकार एवं शिवसेना के आशिष परेडा उपस्थित थे ।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत प्रविष्ट करने गए श्री. सुनील घनवट तथा अन्य हिन्दुत्वनिष्ठ

इस प्रकरण में श्री. घनवट तथा स्थानीय हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के नेताओं ने रायपुर के पुलिस अधीक्षक कार्यालय में इसकी शिकायत भी प्रविष्ट की । इस संदर्भ में श्री. घनवट ने पुणे के अपर पुलिस आयुक्त (अपराध शाखा) कार्यालय में भी लिखित शिकायत प्रविष्ट कर दोषियों पर कठोर कानूनी कार्यवाही की मांग की है ।

श्री. घनवट द्वारा प्रसारित विज्ञप्ति में कहा गया है कि उन्होंने ऐसी किसी प्रकार की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय को नहीं भेजी है अथवा ऐसी शिकायत के लिए किसी को नियुक्त भी नहीं किया है । पत्र पर किया गया हस्ताक्षर भी उनका नहीं है । यह सरासर धोखाधडी है ।

श्री. घनवट के नाम से भेजे गए फर्जी शिकायतपत्र में किसके विरुद्ध शिकायत ?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस फर्जी शिकायत में छत्तीसगढ के कृषि एवं आदिवासी कल्याण मंत्री रामविचार नेताम, साथ ही व्यापारी राकेश अगरवाल, मनोज अगरवाल तथा सुनील अगरवाल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं । केवल इतना ही नहीं, अपितु इस पत्र में भाजपा को भी बदनाम करने का प्रयास करते हुए अतिशयोक्त पद्धति से आरोप लगाए गए हैं । यह स्पष्टता से दर्शाता है कि इस फर्जी शिकायत का उद्देश्य केवल श्री. घनवट की प्रतिमा धूमिल करने तक ही सीमित नहीं है, अपितु ‘राजनीतिक द्वेष के चलते एक बडे समूह को लक्ष्य बनाकर अस्थिरता उत्पन्न करना था ।

श्री. घनवट ने आगे कहा,

कि यह कृत्य अन्य के कंधे पर बंदूक रखकर गोली चलाने जैसा है । यह एक कायरतापूर्ण तथा आपराधिक वृत्ति से प्रेरित षड्यंत्र है, जिसके कारण मेरी सामाजिक एवं सार्वजनिक प्रतिमा धूमिल हुई है । हिन्दू जनजागृति समिति इस प्रकार की झूठी शिकायतों तथा चरित्रहनन के प्रयासों की तीव्र निंदा करती है तथा संबंधित प्रशासन से यह अपेक्षा करती है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर फर्जी शिकायत करनेवालों के विरुद्ध तत्काल न्यायालयीन कार्यवाही की जाए।

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