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‘पहले लिंगभेद किया गया, अब धर्मभेद किया जा रहा है’ – भूमाता ब्रिगेड की तृप्ति देसाई ने उगला विष

‘शनि शिंगणापुर देवस्थान न्यास’ द्वारा सेवा से हटाए गए ११४ मुस्लिम कर्मचारियों को पुनः कार्य पर नियुक्त करने की मांग !

अहिल्यानगर – शनि शिंगणापुर प्रकरण में पहले लिंगभेद किया गया और अब धर्मभेद किया जा रहा है । जो मुस्लिम कर्मचारी हैं, उन्हें हिन्दू धर्म के मंदिर में स्वच्छता का कार्य नहीं करना चाहिए, ऐसी मांग कुछ हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने की थी । अतः न्यास मंडल ने १६७ कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया । उनमें से ११४ कर्मचारी मुस्लिम हैं । उन्हें पुनः कार्य पर नियुक्त किया जाना चाहिए, ऐसी मांग ‘भूमाता ब्रिगेड’ की अध्यक्षा तृप्ति देसाई ने की है । ‘इस विषय में मैं धर्मादाय आयुक्त के पास देवस्थान न्यास के विरुद्ध शिकायत करने जा रही हूं । मुख्यमंत्री से भेंट कर इस विषय में उन्हें ध्यान देने को कहकर, जिन कर्मचारियों को हटा दिया गया है, उन्हें पुनः नियुक्त करने के लिये मैं अनुवर्ती प्रयास करुंगी’, ऐसा भी उन्होंने कहा । (तृप्ति देसाई के अब तक के समस्त आंदोलनों के पीछे केवल प्रसिद्धि प्राप्त करना यही उद्देश्य रहा है, यह पहले भी कई बार स्पष्ट हो चुका है । हिन्दू धर्म के विषय में तनिक भी ज्ञान न रखनेवाली देसाई को उसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, ऐसा ही हिन्दुओं को प्रतीत होता है ! – सम्पादक)

देसाई आगे कहती हैं कि न्यास द्वारा दिया गया अनियमितता का कारण पूर्णतः असत्य है । अगर मुस्लिम धर्म के कुछ लोग शनि शिंगणापुर में सेवा कर रहे हैं, तो यह एक बडा उदाहरण है । हिन्दू धर्म सर्वसमावेशक है । ‘मुसलमानों के दरगाह में हिन्दू धर्म के लोगों को नियुक्त नहीं किया जाता’, ऐसा कहने की अपेक्षा, ‘हमारे हिन्दू धर्म के मंदिर में समस्त धर्मों के कर्मचारियों को अवसर दिया जाता है’, ऐसी भूमिका लेना आवश्यक है ।

क्या है प्रकरण ?

‘शनि शिंगणापुर देवस्थान न्यास’ में कार्यरत मुस्लिम कर्मचारियों को सेवा से हटाने के लिये ‘भारतीय जनता पार्टी आध्यात्मिक आघाडी’ और अन्य हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने आक्रामक भूमिका अपनाई थी । इसमें राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक संग्राम जगताप अग्रणी थे । अन्ततः देवस्थान न्यास ने ११४ मुस्लिम कर्मचारियों सहित १६७ कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया ।

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