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वक्फ कानून और पूजा स्थल अधिनियम के कारण हिंदुओं को न्याय में बड़ी बाधा – विष्णु शंकर जैन, अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय

नागपुर में मंदिर न्यास अधिवेशन संपन्न

दीप प्रज्वलित करते गणमान्य व्यक्ति

नागपुर – “पूजा स्थल अधिनियम हिंदुओं से न्याय मांगने का अधिकार छीनता है, जबकि वक्फ कानून हिंदुओं की जमीन हड़पने का निरंकुश अधिकार देता है। वक्फ बोर्ड द्वारा अवैध रूप से कब्जाई गई जमीनों को वापस पाना संभव नहीं है क्योंकि संयुक्त संसदीय समिति ने भी इस संबंध में कोई सुधार स्वीकार नहीं किया है। इसलिए इन दोनों कानूनों को समाप्त करना आवश्यक है,” यह स्पष्ट विचार सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता श्री विष्णु शंकर जैन ने व्यक्त किए। वे जवाहर विद्यार्थी गृह, सिविल लाइन्स, नागपुर में आयोजित द्वितीय महाराष्ट्र मंदिर-न्यास अधिवेशन में संबोधित कर रहे थे।

देश के सभी मंदिरों को सरकारीकरण से मुक्त कर भक्तों को सौंपें! — श्री सुनील घनवट

इस अधिवेशन में हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति के राष्ट्रीय संयोजक श्री सुनील घनवट ने कहा कि देश के मंदिरों की एक इंच भूमि भी किसी को हड़पने नहीं देंगे। सैकड़ों भ्रष्टाचार के मामलों में चर्च और अन्य धार्मिक स्थलों का अधिग्रहण नहीं किया जाता; केवल मंदिरों को ही निशाना बनाया जाता है। जो सरकारें ईश्वर को नहीं मानतीं, उन्हें मंदिरों का अधिग्रहण करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने उपस्थित मंदिर न्यासियों को संबोधित करते हुए कहा कि सैकड़ों वर्षों के आक्रमणों के बाद भी हमारे मंदिर गौरव के साथ खड़े हैं क्योंकि हमारे पूर्वजों ने अपने प्राणों की आहुति देकर उनकी रक्षा की। अब यह दायित्व हमारा है।

नागपूर येथील मंदिर-न्यास अधिवेशनास उपस्थित मंदिर विश्वस्त

श्री तुळजापुर देवस्थान में 8.5 करोड़ रुपये के घोटाले को रोका ! — अधिवक्ता पू. सुरेश कुलकर्णी

हिंदू विधिज्ञ परिषद के संस्थापक सदस्य एवम उच्च न्यायालय के अधिवक्ता पू. सुरेश कुलकर्णी ने अपने संबोधन में कहा कि मंदिरों की देखभाल का कार्य भक्तों का है, सरकार का नहीं। शासन द्वारा अधिग्रहित श्री तुळजापुर देवस्थान में सरकारी अधिकारियों और ठेकेदारों द्वारा किए गए 8.5 करोड़ रुपये के घोटाले को हमने न्यायालयीन संघर्ष के माध्यम से रोका। उन्होंने सभी हिंदुओं को धर्म के लिए एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया।

इस अधिवेशन में 25 जगह सामूहिक आरती, 45 जगह वस्त्र संहिता से संबंधित सूचना फलक लगाना, 20 मंदिर मे धर्मशिक्षावर्ग का आयोजन, 15 मंदिरो मे धर्मशिक्षा फलक लगाना, गुढी उभारना और पुस्तकालय की स्थापना जैसे उपक्रमों पर भी चर्चा हुई। इन उपक्रमों को मंदिर न्यासियों ने अपनाने का संकल्प लिया।

अधिवेशन का शुभारंभ सनातन संस्था के संत पू. अशोक पात्रीकर, पू. सुरेश कुलकर्णी, गुरुसेवा आश्रम के अध्यक्ष पू. भागीरथी महाराज, अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, श्रीमंत मुधोजी राजे भोसले, डॉ. राजेंद्र खेडेकर और अधिवक्ता पांडुरंग थोरवे के द्वारा दीप प्रज्वलन से किया गया। सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले का संदेश पू. अशोक पात्रीकर ने पढ़ा।

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