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मंदिर ध्वंस षडयंत्र से खपा हैं हिन्दू संगठन

ज्येष्ठ कृष्ण १२ , कलियुग वर्ष ५११५

प्रैस विज्ञप्ति

विहिप कार्यालय में हुई साझा बैठक, रविवार को रण नीति की घोषणा


नई दिल्ली – दिल्ली सरकार की धार्मिक कमेटी द्वारा राजधानी के ७४ धार्मिक स्थलों को तोडे जाने की अनुशंसा से यहाँ के हिन्दूवादी संगठनों में भारी रोष है । विश्व हिन्दू परिषद कार्यालय में आज हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद प्रांत महामंत्री श्री सत्येंद्र मोहन ने दिल्ली सरकार को चेतावनी देते हुए कहा की हिन्दुओं के धर्म स्थलों पर यदि हथौडा चलाने का दू:साहस किया तो इसके गंभीर परिणाम होगे ।

बैठक की विस्तृत जानकारी देते हुए विहिप दिल्ली के मीडिया प्रमुख श्री विनोद बंसल ने बताया कि दिल्ली सरकार की धार्मिक कमेटी द्वारा खुद दिल्ली उच्च न्यायालय को ७४ धार्मिक स्थलों को गिराने की अनुशंसा किए जाने को गंभीरता से लेते हुए हिंदूवादी संगठनों के प्रमुखों ने सरकार की खिंचाई की है। इन सबका कहना था की ऐसी कमेटी को कैसे धार्मिक कहा जा सकता है जो धर्म स्थलों को ही गिराने की अनुशंसा करे. कौन कौन से विधर्मी लोग इसमें सामिल हैं उन्हें सार्वजनिक किया जाए. और धर्म स्थलों को ध्वस्त करने की मानसिकता से बाज आए सरकार ।

राजधानी के सभी हिन्दूवादी संगठनों ने इस सम्बन्ध में एक बडी बैठक आगामी रविवार दिनांक ९ मई को राम कृष्ण पुरम स्थित विहिप मुख्यालय में बुलाई है जिसमें सभी मंदिरों के प्रबंधक व धार्मिक तथा सामजिक संगठनों के प्रमुख तथा कुछ अधिवक्ता भाग लेंगे और आगे की रण नीति की घोषणा की जाएगी ।  आज प्रात: विहिप के झंडेवालान स्थित प्रांत मुख्यालय में हुई बैठक में दिल्ली संत महा मंडल के महा मंत्री महंत नवल किशोर दास, हिन्दू महा सभा के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश कौशिक व डा राकेश रंजन, दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के ॐ प्रकाश आर्य, दारा सेना के मुकेश जैन, विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत उपाध्यक्ष सरदार उजागर सिंह, दीपक कुमार व गुरदीन प्रसाद रुस्तगी, मंत्री राम पाल सिंह सहित राष्ट्रवादी शिव सेना, सनातन धर्म प्रतिनिधि सभा व  मंदिर प्रवंधन कमिटी के पदाधिकारियों ने भाग लिया ।

ज्ञातव्य रहे कि मई के अंत में दिल्ली सरकार की धार्मिक कमेटी ने खुद दिल्ली उच्च न्यायालय को ७५ में से ४० धार्मिक स्थलों को गिराने की अनुशंसा की है। जबकि बाकी ३४ के बारे में कहा गया है कि इनको गिराने का विरोध हो सकता है, इसलिए इन स्थलों के आसपास के लोगों को समझाकर और उनसे बातचीत करके गिराया जा सकता है। कमेटी ने बताया था कि  दिल्ली के ७४ धार्मिक स्थल सरकारी जमीन पर अबैद्य रूप से बने हैं। हिन्दू संगठनो का कहना है कि एक बार प्राण प्रतिष्ठा हो जाने के बाद किसी भी धर्म स्थल या उसके किसी भाग को तोड़ा जान गंभीर अपराध माना जाएगा।

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