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रामायण एक्सप्रेस में वेटर्स को साधु की वेशभूषा देकर हिंदू ‘साधुओं’ का अपमान !

लक्ष्मणपुरी (उत्तर प्रदेश) : पंच दशनाम निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर एवं अखिल भारत हिदू महासभा की राष्ट्रीय सचिव डा. अन्नपूर्णा भारती ने हाल ही में संचालति रामायण एक्सप्रेस ट्रेन में काम करने वाले कर्मचारियों की वेशभूषा पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है। उन्होंने बताया कि रामायण एक्सप्रेस ट्रेन काम करने वाले कर्मचारियों को साधु संन्यासियों का वेश धारण करा कर के उनसे जूठे बर्तन उठावाए जा रहे हैं। यह सनातन संन्यासी परंपरा की वेशभूषा का अपमान है। जिसे संन्यासी कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। सरकार तत्काल इसका संज्ञान ले। इस भूल पर संबंधित विभाग के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। ताकि भविष्य में कोई ऐसी गलती न करे।

भारतीय रेल की ओर से हाल ही में रेलगाडी में कार्यरत परौंसियों को (वेटर्स को) साधु जैसी दिखनेवाली वेशभूषा दी है । इस पर आपत्ति जताते हुए खेड (जनपद रत्नागिरी) के सनातन के साधक डॉ. अशोक शिठदे ने इंडियन रेल्‍वे कैटरिंग एंड टूरिजम कार्पोरेशन (आई.आर्.टी.सी.) के मुख्‍य प्रबंधक को पत्र लिखकर यह वेशभूषा बदलने की मांग की । इसका संज्ञान लेते हुए आई.आर्.टी.सी. के मुख्‍य प्रबंधक अच्‍युत सिंह ने डॉ. शिंदे को के पत्र का उत्तर देते हुए लिखा है कि हमने इसके पूर्व ही परौसियों की वेशभूषा के संदर्भ में आपत्तियों का संज्ञान लिया है । हम इस विषय में उचित कार्यवाही कर सभी कर्मचारियों की वेशभूषा बदलनेवाले हैं ।

उज्जैन के स्वस्तिक पीठाधीश्वर और उज्जैन के अखाड़ा परिषद के पूर्व महामंत्री  डॉ.अवधेशपुरी महाराज ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने इस बारे में रेल मंत्री अश्विन वैष्णव को चिट्ठी लिखी है। इसमें वेटरों की वेशभूषा तुरंत बदलने की मांग की  गई है। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि अगर ड्रेस नहीं बदली गई तो रामायण एक्सप्रेस को चलने नहीं दिया जाएगा।

कई अन्य लोगों ने भी ट्विटर पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है।

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