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‘सोशल मीडिया कॉन्क्लेव’ के समापन सत्र में मान्यवरों द्वारा किया गया मार्गदर्शन

सामाजिक प्रसारमाध्यमों के उपयोग तक ही सीमित न रहते हुए हिन्दू राष्ट्र के विचारों को प्रभावशाली पद्धति से रखनेवाले अभ्यासी वक्ता बनें – सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळेजी, राष्ट्रीय मार्गदर्शक, हिन्दू जनजागृति समिति

सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळेजी, राष्ट्रीय मार्गदर्शक, हिन्दू जनजागृति समिति

हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळेजी ने अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन के अंतर्गत १ दिवसीय ‘सोशल मीडिया कॉन्क्लेव’ के समापन के सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘आज हिन्दू धर्म को अनेक समस्योंने घेर लिया है । इन समस्याआें के विरुद्ध अलग-अलग पद्धति से संघर्ष करने की अपेक्षा धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करना आवश्यक है । इस माध्यम से धर्मकार्य करनेवाले कार्यकर्ता को यह ध्यान में रखना चाहिए कि सामाजिक प्रसारमाध्यमों के द्वारा हमें हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करनी है आैर हमें केवल सामाजिक प्रसारमाध्यमों के (‘सोशल मीडिया’के) उपयोग तक ही सीमित न रहते हुए हिन्दू राष्ट्र के विषय का अध्ययन कर समाज में प्रभावशाली विचार रखनेवाला अभ्यासी वक्ता बनना है । इससे हिन्दू राष्ट्र स्थापना का कार्य अधिक प्रभावशाली पद्धति से होगा ।’’ २ जून को संपन्न इस सत्र में व्यासपीठ पर ‘अपवर्ड’ संगठन के सहसंस्थापक श्री. अजय शर्मा, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के ‘हाई टेक कन्स्ट्रक्शन’ के भागीदार श्री. नंदन मिश्रा, आंध्र प्रदेश के शिवशक्ति संगठन के सदस्य श्री. रंजित वाडियाला आैर अमरावती के आसारामजी बापू संप्रदाय के श्री. मानव बुद्धदेव आदि मान्यवर उपस्थित थे ।

सद्गुरु (डॉ.) पिंगळेजी ने कहा,

१. आजकल वामपंथी लोग उनके द्वारा नियंत्रित प्रसारमाध्यमों के द्वारा अपने विचार हिन्दुआें पर थोप रहे हैं । सोशल मीडिया में इन विचारों का खंडन करनेवाले सनातन धर्म के विचार पहुंचने चाहिए, जिससे फलोत्पत्ति बढ सकती है ।

२. कॉन्क्लेव के माध्यम से एकत्रित होने से हममें धर्मबंधुता उत्पन्न हुई है । अब हमें अपने-अपने क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर हिन्दुत्व का कार्य करनेवालों को इसमें जोडना चाहिए । इसके साथ ही सामाजिक प्रसारमाध्यमों पर धर्मविरोधी विचारों का अच्छे प्रकार से खण्डन करनेवाले तथा कानूनी सहायता मिलने हेतु स्थानीय हिन्दुत्वनिष्ठ अधिवक्ताआें को भी जोडना चाहिए । हिन्दू राष्ट्र स्थापना का लक्ष्य सामने रखकर इस कार्य को किया गया, तो अल्पावधि में आैर अल्प शक्ति में हमें सफलता मिल सकती है तथा इस संगठन के माध्यम से ही ज्ञानशक्ति का कार्य हो सकता है ।

३. हिन्दुआें के साथ हो रहे अन्याय की वास्तविकता ध्यान में आने से स्वयंप्रेरणा से कार्य करनेवाले युवकों में तंत्रकौशल उत्पन्न होकर उसके द्वारा हिन्दुत्व का कार्य करनेवाली नई पीढी को बनाने हेतु प्रयास किए जाने चाहिए ।

वामपंथियों की पोल खोलने में सामाजिक प्रसारमाध्यम सफल ! – रंजित वाडियाला, सदस्य, ‘शिवशक्ति’ संगठन, विशाखापट्टणम्

रंजित वाडियाला, सदस्य, ‘शिवशक्ति’ संगठन, विशाखापट्टणम्

१. आजकल किसी समाचार को समाजतक पहुंचाने के लिए पुस्तकें, समाचारपत्र, दूरदर्शनवाहिनी आदि माध्यम पिछड गए हैं आैर उनका स्थान प्रसारमाध्यमों ने ले लिया है । समाचार पहुंचानेवाले इस माध्यम के पास बडी शक्ति होती है । वह लोगों के दिशादर्शन का कार्य करता है । वामपंथी लोगों ने इस प्रभावशाली माध्यम की शक्ति का महत्त्व पहले ही समझकर उन्हें अपने नियंत्रण में कर लिया । आज के समय में ४-५ संगठनों के पास यह प्रभावशाली माध्यम हैं, जिसके कारण ये संगठन करोडों लोगों को नियंत्रित आैर प्रभावित कर रहे हैं । इसके विरुद्ध सामाजिक प्रसारमाध्यम एक बडा वैचारिक शस्त्र है । वामपंथियों की पोल खोलने में सामाजिक प्रसारमाध्यमों को बडी सफलता हाथ लगी है ।

२. सामाजिक प्रसारमाध्यमों से हमें जो कुछ ‘पोस्ट’ करना है, उस विषय का पहले अध्ययन कर उसके पश्चात उस पर अपना मत रखें । उससे लोगों में हमारे प्रति विश्वास उत्पन्न हेता है । सामाजिक प्रसारमाध्यमों में स्वयं की प्रतिमा बनाना आवश्यक है । किसी में परिवर्तन लाने का प्रयास न करते हुए वास्तविकता सामने रखनी चाहिए, जिससे लोग अपनेआप ही हमारी आेर झुकते हैं ।

सामाजिक प्रसारमाध्यमों में विद्यमान लेखन नवीनतापूर्ण एवं वैश्विक स्तर का होना आवश्यक ! – अजय शर्मा, अपवर्ड, सहसंस्थापक

अजय शर्मा, अपवर्ड, सहसंस्थापक

भारत के प्रसारमाध्यम वामपंथी विचारधारावाले लोगों के नियंत्रण में हैं । उसके कारण वहां हिन्दू धर्म को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता आैर उससे हिन्दू संस्था एवं संगठन मुख्य प्रवाह से दूर हो जाते हैं तथा हिन्दू धर्म पर हो रहे आघातों के विरुद्ध हिन्दुआें का वैचारिक प्रतिकार न्यून पड जाता है । एेसी स्थिति में हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों को अब केवल इलेक्ट्रॉनिक प्रसारमाध्यमों पर निर्भर न रहते हुए विश्व के सामने सामाजिक प्रसारमाध्यमों द्वारा विचार रखने चाहिए । विश्व में हमारे विचार स्वीकार्य हो; इसके लिए हमें सामाजिक प्रसारमाध्यमों में नविनतापूर्ण एवं वैश्विक स्तर का लेखन करना आवश्यक है, साथ ही हमें इस क्षेत्र में निवेश भी करना चाहिए ।

दुष्प्रचार का खंडन करनेवाले धर्मप्रेमियों के साथ खडे रहना चाहिए ! – नंदन मिश्रा, ‘हाई टेक कन्स्ट्रक्शन्स’

नंदन मिश्रा, ‘हाई टेक कन्स्ट्रक्शन्स’

‘हाई टेक कन्स्ट्रक्शन्स’ के श्री. नंदन मिश्रा ने कहा, ‘‘जो लोग सामाजिक प्रसारमाध्यमों के द्वारा हिन्दुआें का पक्ष रखते हैं अथवा हिन्दू धर्म पर हो रहे आघातों के विरुद्ध वैचारिक खण्डन करते हैं, उन्हें वामपंथी विचारधारावाले लोगों के द्वारा लक्ष्य बनाया जाता है । इसके साथ ही कुछ धर्मप्रेमी जब इस दुष्प्रचार के विरुद्ध एेतिहासिक तथ्य रखते हैं, तब उनके खाते निलंबित किए जाते हैं । हम सभी को एेसे धर्मप्रेमियों के साथ खडे रहकर एक-दूसरे की सहायता करनी चाहिए आैर आवाज उठानी चाहिए ।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘प्रसारमाध्यमों के द्वारा हिन्दू धर्मपर आघात किए जाते हैं । तब उसके विरुद्ध वैचारिक पद्धति से संघर्ष करनेवाले धर्मप्रेमियों को आधुनिकतावादी अथवा वामपंथी विचारक अपना लक्ष्य बनाते हैं । तब प्रसारमाध्यमों पर सक्रिय हिन्दुआें की आेर से सहयोग नहीं मिलता । इसके विपरीत वामपंथी संगठित होते हैं । सामाजिक माध्यमों से अपने विचार रखते समय शब्दों का चुनाव विचारपूर्वक किया जाना चाहिए आैर जहां आवश्यक होगा, वहां धैर्य आैर दृढता से विरोध करना चाहिए ।’’

अमरावती के आसारामजी बापू संप्रदाय के मानव बुद्धदेव को सामाजिक प्रसारमाध्यमों का प्रभावशाली उपयोग करते समय प्राप्त अनुभव !

मानव बुद्धदेव

१. एक समाचारपत्र द्वारा स्वामी गोविंददेवगिरी महाराज ने आसाराम बापूजी को ‘रावण’ कहे जाने का झूठा समाचार प्रकाशित किया गया था । ‘वॉटस् एप’ के माध्यम से संतों को बदनाम करनेवाले इस समाचारपत्र का संपर्क क्रमांक आसाराम बापूजी के अन्य भक्तों को भेजे जाने पर इस समाचारपत्र के संपादक को अनेक कॉल किए गए । आैर एक समाचारपत्र ने कुछ एेसा ही किया । इस बार भी भक्तों को इस समाचारपत्र का संपर्क क्रमांक भेजा गया । इसके फलस्वरूप उस समाचारपत्र को अपने पहले पृष्ठ पर क्षमापत्र प्रकाशित करना पडा ।

२. एक बार एक सभा में पिछडे वर्ग का प्रतिनिधित्व करनेवाले एक नेता ने वक्तव्य देते हुए कहा, ‘‘भगवद्गीता कूडेदान में फेंक दें ।’’ तब उसके प्रत्युत्तर के रूप में ‘भगवद्गीता को यदि फेंकना ही हो, तो उसे पहले आपके कचरे के डब्बे अर्थात मस्तिष्क में फेंक देना चाहिए ।’, इस आशय की एक कविता बनाकर उसे ‘युट्यूब’ पर पोस्ट किया गया, जिसका कई लोगों से अच्छा प्रत्युत्तर प्राप्त हुआ ।

३. निषेध के दूरध्वनि करते समय उसे संयमित पद्धति से करना चाहिए । प्रमाण हेतु शिकायत करते समय ‘कॉल रेकॉर्ड’ करना चाहिए, साथ ही भ्रमणभाष का ‘स्क्रीनशॉट’ खींचना चाहिए । कई बार हिन्दू भाई ‘व्हॉटस्एप’पर कोई संदेश आने पर उसे बिना देखते ही फॉरवर्ड करते हैं ।

इस अवसर पर श्री. मानव बुद्धदेव ने कहा, ‘‘अन्य समाचारपत्र झूठे समाचार छापते हैं; इसलिए मैं सनातन प्रभात के अतिरिक्त अन्य कोई समाचारपत्र नहीं पढता ।’’

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