
नई देहली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, दुनिया को मानवता के दुश्मनों से बचाने के लिए दैवीय शक्तियां हमेशा से हमारे साथ है। उनकी सरकार बुरी शक्तियों और दुष्टों को यही संदेश देने का प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री ने इस्कॉन के एक कार्यक्रम में यह टिप्पणी की। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी शिविरों को निशाना बनाया और उसके बाद प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे थे।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मानवता के दुश्मनों से धरती को बचाने के लिए प्रभू की शक्ति हमेशा हमारे साथ रहती है। यही संदेश हम पूरी प्रमाणिकता के साथ दुष्ट आत्माओं, असुरों को देने का प्रयास कर रहे हैं।’ वह ८०० किलो के ६७० पृष्ठों वाली विशाल गीता का विमोचन करने के लिए दक्षिणी देहली में स्थित इस्कॉन मंदिर पहुंचे थे।
दुनिया के लिए उपहार है गीता
सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि गीता अभी तक ज्वलंत है और यह विश्व के लिए एक उपहार है। उन्होंने कहा कि गीता में सभी प्रश्नों का उत्तर मौजूद है। यदि आप छात्र हैं या सरकार के मुखिया इसमें सभी के लिए उत्तर है। इसमें सभी समस्याओं का समाधान है।
इससे पहले पीएम मोदी खान मार्केट मेट्रो स्टेशन से देहली मेट्रो में सवार होकर इस्कान मंदिर पहुंचे। उन्होने इस्कॉन-ग्लोरी ऑफ इंडिया कल्चरल सेंटर में गीता आराधना कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
गौरतलब है कि महाभारत युद्ध के दौरान कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेशों का संकलन श्रीमद्भागवत गीता दुनिया का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला पवित्र ग्रंथ है। दुनिया को कर्म व पुरुषार्थ की प्रधानता बताने वाले इस ग्रंथ का सबसे बड़ा संस्करण अब ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित इस्कॉन मंदिर में देखने को मिलेगा।
भगवान श्रीकृष्ण के संदेशों को विश्वभर में प्रसारित करने के उद्देश्य से तैयार इस ग्रंथ का अनावरण मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। विश्व की इस सबसे बड़ी गीता को बनाने में करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसे इटली के इस्कॉन में बनाया गया है।
इसे रखने के लिए दो टन का हाइड्रोलिक स्टैंड बनाया गया है। कुल ६७० पृष्ठों वाली यह गीता १२ फीट लंबी और नौ फीट चौड़ी है। इसे बनाने में ढाई साल लगे हैं। इसके पन्नों को जोड़ने के लिए जापानी बाइंडिंग तकनीक का उपयोग किया गया है।
इस्कॉन के संस्थापक आचार्य श्रील भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने गीता प्रचार के ५० साल पूरे करने के उपलक्ष्य में इसे बनवाया है। बताया जा रहा है कि २०२० के बाद कुरुक्षेत्र में बन रहे श्रीकृष्ण-अर्जुन मंदिर में इसे स्थापित किया जा सकता है।
स्त्रोत : जागरण








