इराक एक एेसा राष्ट्र जो स्वंय मुस्लिम बहुल होने के बावजुद ISIS जैसे कट्टरपंथी संगठन से जूझ रहा है । अलग अलग देश से आज तक ISIS में कर्इ लोग सहभागी हुए है तथा जो लोग इस संगठन में सहभागी होने के कगार पर थे उन्हे समय पर ही गिरफ्तार किया गया है । भारत के भी कर्इ राज्यों से युवा इस संगठन से जुडने के लिए जा चुके है । कुछ युवाआें को सहभागी होने से पहले गिरफ्तार भी किया जा चुका है परंतु उनका कौसलिंग कर के उन्हे छोड दिया जाता है, यह देश की सुरक्षा के लिए बहुत ही गंभीर तथा धोकादायक है । परंतु अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण में अंधी हो चुकी देश की यंत्रणा को इस बात से कोर्इ मतलब नही है ! आतंकी कार्रवार्इयों में संलिप्त देशद्रोहीयाें पर भारत इराक जैसा कदम उठाएं वो दिन देश के लिए महत्त्वपूर्ण होगा !

बगदाद : इराक की एक न्यायालय ने जर्मनी की महिला को आतंकी संगठन ISIS में शामिल होने के लिए फांसी की सजा सुनाई है । आतंकी समूह को अपराध करने के लिए सैन्य सहायता और अन्य मदद देने के आरोप में बगदाद की न्यायालय ने महिला को यह सजा सुनाई है ।
सर्वोच्च न्यायिक परिषद के प्रवक्ता, अब्दुल-सत्तार ने कहा कि महिला ने यह मान लिया है कि उसने जर्मनी से सीरिया आकर ISIS जॉइन किया और फिर वह अपनी दो बेटियों के साथ इराक आ गई । दोनो बेटियों का बाद में आतंकवादियों से विवाह हो गया ।
माना जा रहा है कि महिला जब सीरिया रवाना हुई तब वह जर्मनी के मैनहेम में रहती थी परंतु मूल रूप से वह मोरक्को की है । यह महिला उन असंख्य महिलाओं में शामिल है जिन्हें जुलाई २०१७ में मोसुल से इस्लामिक स्टेट के सफाए के बाद इराकी सेना ने पकडा था । प्रवक्ता ने बताया कि, अब महिला को फांसी होगी ही परंतु अभी भी उसके पास आगे अपील करने का मौका बचा हुआ है ।
एक समूह द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट की माने तो वर्ष २०११ में आई अरब क्रांति के बाद से तकरीबन २७ हजार विदेशी लडाके इराक और सीरिया पहुंचे हैं । इनमें से ६ हजार यूरोपियन हैं । हालांकि, ये सब आईएस में शामिल नहीं हुए हैं ।
इससे पहले पिछले साल एक रूसी महिला को ISIS में शामिल होने के आरोप में फांसी हुई थी । इराक ने पिछले महीने ISIS के सफाए की घोषणा की थी । वर्ष २०१४ में IS ने इराक के लगभग एक तिहाई हिस्से पर कब्जा कर लिया था ।








