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अमेरिका में हिन्दुत्व पढा रहे प्रोफेसर ब्राइन के. पेनिंग्टन ने कहा, ‘हिन्दुत्व से बेहतर कोई और व्यवस्था नहीं !’

हमें पता है कि, हमारा हिन्दू धर्म कितना प्राचीन एवं महान है । परंतु आज जहां भारत के जन्महिन्दू अपने इस महान धर्म का पालन तथा आचरण करने में पिछडापन मानकर पाश्चिमी सभ्यता को चुन रहे है, वही पश्चिमी लोग इस महान धर्म तथा संस्कृती की आेर आकर्षित हो रहे है । उसपर संशोधन कर रहे है एवं भारतीय संस्कृती, हिन्दू धर्म की महानता विश्व के सामने ला रहे है । इसके कर्इ उदाहरण हमने देखे है । एेसा ही एक उदाहरण आज हम देखेंगे । जिससे आपको अपने हिन्दू होनेपर गर्व अनुभव होगा । . . . तो आइए हिन्दू धर्म का महत्त्व समझकर उसे संजोए रखने हेतु प्रयास करने का संकल्प करते है ।

प्रोफेसर ब्राइन के. पेनिंग्टन

बीते ढाई दशक में मैंने हिन्दुत्व को जितना पढा और समझा, उसका सार यही है कि जीवन को संचालित करने की हिन्दुत्व से बेहतर कोई और व्यवस्था नहीं । दुनिया के किसी भी धर्म का उद्भव व उद्देश्य मानव सभ्यता के विकास क्रम में और मानवीय जीवनशैली को बेहतर बनाने पर केंद्रित रहा है ।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय के उस मत से मैं पूरी तरह सहमत हूं, जिसमें हिन्दुत्व को ‘वे ऑफ लाइफ’ (जीवन पद्धति) माना गया है । मेरे जीवन में भी हिन्दुत्व का बडा महत्व है और यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मैं हिन्दुत्व पर शोध कर रहा हूं ।

यह कथन अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना स्थित ऐलोन यूनिवर्सिटी में धार्मिक इतिहास विभाग के सीनियर प्रोफेसर ब्राइन के. पेनिंग्टन का है । ५४ वर्षीय प्रो. ब्राइन हिन्दुत्व एवं हिन्दू मान्यताओं पर अब तक तीन पुस्तकें लिख चुके हैं । इन दिनों शोध के सिलसिले में वे भारत आए हुए हैं ।

माघ मेले में शामिल होने आया हूं

माघ मेले में शामिल होने और हिन्दू धर्म, दर्शन व मान्यताओं पर अपने शोध को आगे बढाने के लिए भारत आए प्रो. ब्राइन ने कहा, हिन्दुत्व पर लंबे शोध में मैंने अब तक यही पाया कि सांस्कृतिक मूल्यों और मान्यताओं के रूप में हिन्दुत्व का इतिहास मानव सभ्यता के विकास जितना ही पुराना है । परंतु एक धर्म के रूप में इसके सभी सांस्कृतिक मूल्यों और समान मान्यताओं का एकीकरण क्रमिक चरण में हुआ ।

प्रोफेसर ने बताया कि हिन्दू धर्म के इतिहास पर शोध करने के लिए वे वर्ष १९९३ में पहली बार भारत आए थे । हिन्दुत्व को लेकर अब तक उनकी तीन पुस्तकें ‘वास हिन्दुइज्म इनवेंटेड’, ‘रीचिंग रिलीजियन एंड वाइलेंस’ और ‘रिचुअल इनोवेशन’ प्रकाशित हो चुकी हैं ।

हिन्दुत्व पर अब शोध की थीम क्या है ? इस पर उन्होंने कहा, आज भी वही है, जो पहले थी- हिन्दुत्व को समझना । इस समय शोध का विषय देवी-देवताओं और हिन्दुत्व के बीच संबंध पर केंद्रित है । माघ मेले में सम्मिलित होने के अलावा मुझे कुछ पौराणिक स्थलों और देवी-देवताओं से संबंधित जानकारियों का संकलन करना है ।

अमेरिकी विवि का पाठ्यक्रम

प्रो. ब्राइन के अनुसार अमेरिकी विवि में रिलीजियस स्टडीज में हिन्दुत्व के बारे में सबसे पहले हिन्दुत्व का इतिहास पढाया जाता है । हिन्दू दर्शन को समझा सकने वाले वेद, पुराण, उपनिषद, गीता, रामायण, महाभारत सहित अन्य रचनाएं पाठ्क्रम में शामिल हैं । इसके अलावा स्वामी विवेकानंद, माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर जैसी व्यक्तित्व भी पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं । प्रोफेसर ने स्पष्ट किया कि हिन्दुत्व के बारे में जो भी पढाया जाता है, वह प्रमाणों और तथ्यों पर आधारित होता है । इसके लिए शोध भी किया जाता है ।

१६ साल का था तब पहली बार पढी गीता

इस अमेरिकी प्रोफेसर ने कहा, जब मैं १६ वर्ष का था, तब पहली बार गीता पढी । इसी के बाद मेरी हिन्दुत्व के प्रति रुचि जागृत हुई । फिर तो मैंने वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत सहित सभी धर्मशास्त्रों, १५ वीं शताब्दी से लेकर २० वीं शताब्दी तक के सभी संतों और विवेकानंद, गोलवलकर जैसे महापुरुषों के बारे में भी अध्ययन किया । महाभारत ग्रंथ को पढ़कर मैं खासा प्रभावित हुआ । महाभारत में जो किरदार हैं, उनका अपना अलग महत्व है । खासकर युधिष्ठिर से मैं सबसे अधिक प्रभावित हुआ । जबकि, रामायण समझने में अति सरल है ।

सकारात्मक आस्था के मामले में हिन्दू धर्म सर्वश्रेष्ठ

प्रो. ब्राइन का मानना है कि सकारात्मक आस्था के मामले में हिन्दू धर्म सभी धर्मों में श्रेष्ठ है । उन्होंने कहा, इसका उदाहरण गंगा नदी के रूप में देखा सकता है । गंगा को माता का दर्जा दिया गया है, परंतु उसका जल सभी के लिए बराबर है । हिन्दुत्व में मानव सभ्यता के उच्चतम आदर्शों व मूल्यों का समावेश है और प्रकृति पूजा इसके मूल में है ।

स्त्रोत : नर्इ दुनिया

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