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विजयपुर (कर्नाटक) में गूंजा हिन्दू धर्मजागृति सभा का रणसिंघा : ३ सहस्र से अधिक उपस्थिति

चैत्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी, कलियुग वर्ष ५११७

अब गांधी जयंती नहीं, अपितु क्रांतिकारियोंकी जयंती मनाएं ! – श्री. प्रमोद मुतालिक

सभा की अनुमति के लिए १ मास से प्रयास करने के पश्चात भी सभा के ३ घंटा पूर्व अनुमति प्राप्त हुई !

विजयपुर(कर्नाटक) : हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा गुरुवार, १८ मार्च को सायंकाल के समय विजयपुर के श्री संगन बसव समुदाय भवन में हिन्दू धर्मजागृति सभा संपन्न हुई। उस समय श्रीराम सेना के संस्थापक अध्यक्ष  श्री. प्रमोद मुतालिक ने वक्तव्य दिया। अपने वक्तव्य में उपस्थित व्यक्तियोंको उन्होंने यह आवाहन किया कि ‘अगले ६ दिसम्बर को श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य आरंभ करेंगे। हिन्दू समाज में बल है, सामथ्र्य है। भगतसिंह, राजगुरु एवं सुखदेव का स्मरण कर हिन्दू समाज को जागृत करना आवश्यक है। अतः अब गांधी जयंती मनाने की अपेक्षा आगे इन क्रांतिकारियों की जयंती मनाकर हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करेंगे ।’ इस सभा के लिए ३ सहस्र से अधिक हिन्दू धर्माभिमानी उपस्थित थे।

श्रीराम सेना के संस्थापक अध्यक्ष श्री. प्रमोद मुतालिक के हाथों दीपप्रज्वलन कर वेदमंत्रोंके चैतन्यमय वातावरण में सभा प्रारंभ हुई। इस सभा में सनातन संस्था की कर्नाटक राज्य प्रसारसेविका कु. प्रियांका स्वामी, बेंगलुरू उच्च न्यायालय के अधिवक्ता श्री. अमृतेश एन्.पी., हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. गुरुप्रसाद ने उपस्थित व्यक्तियोंको संबोधित किया।

अधिवक्ता श्री. अमृतेश एन्.पी. ने बताया कि ‘आज समाज में स्त्रियोंके चारित्र के संदर्भ में अनादरयुक्त लेख लिखे जाते हैं; इसलिए समाज की अधोगति हो रही है। भगवद्गीता का अनादर करनेवाले प्रा. भगवान को उनका नाम परिवर्तन करना चाहिए। यदि चुनाव के समय सर्व हिन्दू राष्ट्र तथा धर्म के प्रति अभिमानी उम्मीदवारोंको चुन कर उन्हें विधानसभा में भेजें, तो ही हिन्दुत्व शेष रहेगा।’

कु. प्रियांका स्वामी ने यह वक्तव्य दिया कि ‘यदि मुसलमानोंको बुरखा पहनने में लज्जा प्रतीत नहीं होती, तो हम कुमकुम धारण करने में क्यों लज्जित हों ? वे टोपी परिधान करने में लज्जित नहीं होते, तो हम तिलक धारण करने में क्यों लज्जित होंगे ? ‘पीके’ चित्रपट में खान कहता है कि ईश्वर है ही नहीं ; किंतु स्वयं ५ बार नमाज क्यों पढता है, यह प्रश्न उन्हें पूछें !’

श्री. गुरुप्रसाद ने यह वक्तव्य दिया कि ‘राष्ट्र एवं धर्म पर आने वाली एक- एक आपत्ति के विरुद्ध लडने की अपेक्षा हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करना अधिक महत्त्वपूर्ण है। किसी भी व्यक्ति के लिए आदर्श राज्य कौन सा है ? यह प्रश्न पूछने पर रामराज्य तथा आदर्श राजा कौन ? यह पूछने पर, ‘राम,’ यही उत्तर प्राप्त होता है; अत एव रामराज्य पुनर्स्थापित करने के लिए ‘हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करना आवश्यक है।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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