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श्रीमंत मुधोजीराजे भोसले का आरोप
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मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल

पुणे – ‘राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद’ अर्थात एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा स्कूल की पाठ्यपुस्तकों से मराठा साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास को दर्शाने वाला ‘अटक से कटक’ तक के विस्तार का नक्शा हटा दिया गया है। यह मराठों के इतिहास को मिटाने का प्रयास है। यह नक्शा क्यों हटाया गया ? इसका संतोषजनक उत्तर भी वे नहीं दे पा रहे हैं। महाराष्ट्र के जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता के कारण महाराष्ट्र के गौरवशाली इतिहास पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है। इस अन्याय के विरोध में हमने मुंबई उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है, ऐसा वक्तव्य श्रीमंत मुधोजीराजे भोसले ने दिया। वे ५ मई को पुणे के पत्रकार भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में बोल रहे थे।
श्रीमंत मुधोजीराजे भोसले द्वारा रखे गए प्रमुख मुद्दे
१. इस नक्शे को हटाने से समाज, विशेषकर बच्चों के मन में गलत संदेश जा रहा है। क्या मराठों का इतिहास अब केवल कहानियों और चर्चाओं तक ही सीमित रह गया है ? ऐसा प्रश्न उत्पन्न हो रहा है।
२. इस नक्शे को हटाने के लिए राजस्थान के राजनीतिक नेताओं और राजघरानों ने केंद्रीय शिक्षा मंडल पर दबाव बनाया है।
३. इस संबंध में ११ मार्च २०२६ को महाराष्ट्र विधान परिषद में प्रश्न उठाया गया था। तब राज्यमंत्री ने जानकारी दी कि “उर्दू और मराठी माध्यम की पुस्तकों से यह नक्शा गायब है। राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार को पत्र भेजने के बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया गया। उल्टा बाद में अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकों से भी यह नक्शा हटा दिया गया।”
४. आगामी शैक्षणिक वर्ष २०२६-२७ की पुस्तकों में भी यह नक्शा शामिल नहीं किया जाएगा, इस पर उन्होंने खेद व्यक्त किया। साथ ही राज्य सरकार पर केवल खोखले आश्वासन देने का आरोप लगाया।
५. जब जनप्रतिनिधि जनता के साथ विश्वासघात करते हैं, तब न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, ऐसा कहते हुए उन्होंने याचिका दाखिल करने की बात कही।
६. यह नक्शा पुनः पाठ्यपुस्तकों में शामिल होने तक आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा।
नरवीर तानाजी मालुसरे के १३वें वंशज कुणाल मालुसरे ने कहा, “जब तक एन.सी.ई.आर.टी. की पाठ्यपुस्तकों में यह नक्शा पुनः शामिल नहीं किया जाता, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा। हम शांत नहीं बैठेंगे।”
‘हिंदू बांधव समिति’ के अध्यक्ष रवी पडवळ ने कहा, “आज के राजनेता छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम लेकर सत्ता में आए हैं; लेकिन इस विषय पर एक भी जनप्रतिनिधि आगे नहीं आ रहा। सभी राजनेता निष्क्रिय होकर सोए हुए हैं। इस मांग के लिए हम तीव्र आंदोलन करेंगे।”








