
इस्लामाबाद : पाकिस्तान में एक बार फिर अल्पसंख्यक हिंदुओं की आस्था पर हमला हुआ है। कराची में एक ऐतिहासिक इमारत की दीवारों पर बनी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां खंडित की गई हैं। इससे अल्पसंख्यकों में भारी नाराजगी है, लेकिन पाकिस्तान की इस्लामी हुकूमत ने इस पर चु्प्पी साध रखी है। पुलिस की ओर से भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों, प्रतीकों और मूर्तियों पर हमले की यह कोई पहली घटना नहीं है। इस देश में हर साल बड़े पैमाने पर हिन्दू लड़कियों को अगवा भी किया जाता है, जिसके बाद उनका जबरन निकाह कर दिया जाता है।
पाकिस्तान के पंजाब सूबे के बहावलपुर जिले के अल्पसंख्यक अधिकार संगठन के चेयरमैन शिव काछी ने एक्स पर लिखा, “कराची की ऐतिहासिक ‘सगन मैसन’ इमारत में भगवान कृष्ण और गोपियों की मूर्तियों का अपमान बेहद और कड़े शब्दों में निंदनीय है। यह सिर्फ किसी इमारत को पहुंचाया गया नुकसान नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की बहुसांस्कृतिक विरासत, धार्मिक सद्भाव और अल्पसंख्यक समुदायों की भावनाओं पर किया गया हमला है।”
पाकिस्तान सरकार से कार्रवाई की मांग
उन्होंने कहा, “हम इस शर्मनाक हरकत की कड़ी निंदा करते हैं। कराची में M.A. जिन्ना रोड पर स्थित यह ऐतिहासिक इमारत 1937 में बनाई गई थी और यह हिंदू धार्मिक प्रतीकों की समृद्ध उपस्थिति को दर्शाती है। भगवान कृष्ण और गोपियों की मूर्तियों के सिर काटना न केवल धार्मिक अनादर का कृत्य है, बल्कि हमारी साझा विरासत का विनाश भी है।” उन्होंने पाकिस्तान के शीर्ष राजनेताओं को टैग करते हुए लिखा, “हम मांग करते हैं कि संबंधित अधिकारी इस मामले का तत्काल संज्ञान लें। दोषियों को बिना किसी देरी के गिरफ्तार किया जाए और उन्हें कड़ी सजा दी जाए। इस ऐतिहासिक इमारत की तत्काल बहाली और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।”
Karachi Sindh
The desecration of the statues of Bhagwan Krishna and the Gopis at the historic Sagan Mason building in Karachi is deeply and strongly condemnable. This is not just damage to a structure, but an attack on Pakistan’s multicultural heritage, religious harmony, and the… pic.twitter.com/1qmAjbW0dS— Shiva Kachhi (دراوڙ)🇵🇰 (@FaqirShiva) April 1, 2026
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं को लगातार सताया जा रहा है। उनको बराबरी का नागरिक तक नहीं समझा जाता है। बड़ी बात यह है कि पाकिस्तान की पुलिस और अदालत भी हिंदुओं से संबंधित मामलों पर ज्यादा ध्यान नहीं देती है।
स्रोत : नवभारत टाइम्स








