गोवा में ‘हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति’ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में उनकी उपस्थिति

फोंडा (गोवा) – श्रीराम मंदिर प्रकरण में विजय प्राप्त होने के बाद अब वास्तविक अर्थों में एक नए संघर्ष की शुरुआत हुई है। आगे ज्ञानवापी, संभल और आदिनाथ मंदिर जैसे अनेक मामलों में न्यायालयीन लड़ाई जारी है। श्रीराम मंदिर मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय ऐतिहासिक और विशेष था; किंतु देश के अन्य कई मामलों में न्यायालयों के निर्णय एकांगी दिखाई देते हैं।
सरकारी नियंत्रण में लिए गए मंदिरों की आय के दुरुपयोग की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। देशभर में विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग समस्याएं होने के कारण किसी एक अधिवक्ता के लिए हर जगह कानूनी लड़ाई लड़ पाना संभव नहीं है। इसलिए हिंदुत्वनिष्ठ अधिवक्ताओं का एक सशक्त संगठन बनाकर हिंदू समाज के हित में समन्वित रूप से न्यायालयीन संघर्ष करना समय की मांग है। यह वक्तव्य अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने गोवा में आयोजित एक शिविर में दिया।
यह शिविर ‘हिंदु राष्ट्र समन्वय समिति’ के संयोजकों के लिए आयोजित किया गया था।
समिति की पृष्ठभूमि और कार्य
अखिल भारतीय हिंदू अधिवेशन में हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों को एकत्रित कर समन्वित कार्य करने के उद्देश्य से हिंदु राष्ट्र समन्वय समिति की स्थापना की गई थी। पिछले दो वर्षों में समिति ने 8 राज्यों के 20 जिलों में विभिन्न आंदोलनों का आयोजन किया है। वर्तमान में देशभर की 400 से अधिक हिंदुत्वनिष्ठ संस्थाएँ हिंदू राष्ट्र की स्थापना के ध्येय से इस मंच के माध्यम से एकत्रित होकर कार्य कर रही हैं।
इसी दिशा में कार्यरत संयोजकों के लिए गोवा के फोंडा में 3 दिवसीय शिविर आयोजित किया गया। इस अवसर पर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के साथ दिल्ली की अधिवक्ता अमिता सचदेवा, समिति के पदाधिकारी सुनील घनवट तथा वैभव आफळे मंच पर उपस्थित थे।
अधिवक्ताओं के अनुभव और मार्गदर्शन
शिविर के प्रथम दिन के उद्घाटन सत्र में अधिवक्ता जैन और अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने राष्ट्ररक्षा तथा धर्मजागरण से संबंधित अपने अनुभवों और चल रहे प्रयासों की जानकारी दी।
अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने कहा कि, हेट स्पीच के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने पुलिस को स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है; किंतु व्यवहार में पुलिस केवल हिंदुत्वनिष्ठ व्यक्तियों को ही निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं पर हो रहे विभिन्न प्रकार के निरंतर आघातों के विरुद्ध संगठित, योजनाबद्ध और सतत प्रयास करना आवश्यक है।








