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लोकल ट्रेन से लेकर एक्सप्रेस ट्रेन तक सार्वजनिक परिवहन में खुलेआम ईसाई धर्म-प्रचार

सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक प्रचार पर रोक लगाने के लिए रेलवे प्रशासन कानून को सख्ती से लागू करें ! – सम्पादक, हिन्दुजागृति

पनवेल से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) आने वाली लोकल ट्रेन में एक ईसाई महिला द्वारा ऊंची आवाज में बाइबल और यीशु के संदेशों का प्रचार किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है।

वीडियो में महिला कहती हुई दिखाई देती है — “यीशु जीवित है… उसने मेरे पाप और शर्म को अपने ऊपर लिया है… जो विश्वास करेगा उसे स्वर्ग मिलेगा।”

रिपोर्टों के अनुसार यह महिला पिछले सवा महीने से पुरुषों के डिब्बे में जाकर इसी तरह धर्म-प्रचार कर रही है।

सोशल मीडिया में रोष

यात्रियों ने कहा कि, बहुसंख्य हिंदू यात्रियों वाली लोकल में यह व्यवहार आक्षेपार्ह और मानसिक उत्पीड़न है। कई लोगों ने रेलवे प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। यह भी कहा गया कि, सार्वजनिक स्थान पर किसी भी धर्म का प्रचार-प्रसार स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

अजंता एक्सप्रेस के स्लीपर डिब्बों में ‘जिजस क्राइस्ट’ के स्टिकर्स

दुसरी गंभीर शिकायत ट्रेन संख्या 17064 अजंता एक्सप्रेस से सामने आई है। एक यात्री ने बताया कि, ट्रेन के स्लीपर कोचों में ‘जिजस क्राइस्ट’ के स्टिकर्स चिपकाए गए हैं।

यात्री यह देखकर स्तब्ध रह गए कि एक सरकारी सार्वजनिक परिवहन के डिब्बों में धार्मिक प्रचार सामग्री लगाई गई है। उन्होंने तत्काल सभी स्टिकर्स हटाए जाने की रेलवे प्रशासन से मांग की है।

ये दोनों घटनाएँ संकेत देती हैं कि सार्वजनिक परिवहन में धार्मिक प्रचार तेजी से बढ़ रहा है, जो कानून, रेलवे नियम और सामाजिक संतुलन — तीनों के विरुद्ध है।

कर्नाटक में भी इसाई धर्मप्रचार

एक अन्य हालिया घटना में, बेंगलुरु में बीएमटीसी बसों के आंतरिक ग्लास पैनलों पर ईसाई धर्म को बढ़ावा देने वाले स्टिकर चिपकाए गए थे। एक्स पर हिंदू जनजागृति समिति द्वारा कड़ी आपत्ति जताए जाने के बाद उन्हें हटा दिया गया।

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