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धर्मांध खान माफियाओं से विरार (जिला ठाणे) के टीले पर स्थित मंदिर को लक्ष्य बनाया !

  • टीले को तोड़ने के लिये अवैध रूप से जिलेटिन एवं विस्फोटकों का उपयोग

  • धर्मांधो द्वारा मंदिर के पुजारी को धमकी

विरार (जिला ठाणे) – यहां के कनेरफाटा वन प्रदेश की एक टीले पर ७० वर्ष से अधिक प्राचीन मंदिर स्थित है । खान ठेकेदार एवं माफिया महबूब बलूच तथा फिरोज बलूच ने उसे ध्वस्त करने का षड्यन्त्र रचा है । गत वर्ष से ही इस टीले को लगभग पूर्णतया खान ठेकेदारों ने घेर लिया है । उन्हें वहां ‘जेसीबी’ यंत्र से खुदाई करने की अनुमति प्राप्त थी ; किन्तु उन्होंने अवैध रूप से जिलेटिन एवं विस्फोटक लाकर टीला फोड़ना आरंभ किया । इसके कारण टीले में ५० फुट गहरी दरार उत्पन्न हुई है । मंदिर के चारों ओर गहरे गड्ढे बन गये हैं । मंदिर की दीवारों एवं इन गड्ढों के मध्य अब केवल १ से २ फुट भूमि शेष है । इस कारण मंदिर की दीवारों में दरारें पड़ गयी हैं । विस्फोटकों से टीला फोड़ना पूर्णतया अवैध है ।

 

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मंदिर किसी भी क्षण ढहने की स्थिति में !

पिछले ५० वर्षों से एक पुजारी यहां पूजा कर रहे हैं । उन्हें आहिल खान ने धमकाया है । पुजारियों को भय है कि किसी भी क्षण मंदिर गिर सकता है । इन पुजारियों ने कहा कि जब उन्होंने मंदिर की हो रही हानि के विषय में आपत्ति प्रकट की तो ठेकेदार खान ने उन्हें धमकी दी । धर्मान्धों ने कहा कि मंदिर अन्य स्थान पर स्थापित किया जायेगा । धर्मान्धों ने विस्फोटकों के विषय में किसी को न बताने की धमकी भी पुजारियों को दी ।

प्रसार माध्यम एवं प्रशासन मौन !

धर्मान्धों के इस अवैध अतिक्रमण के कारण मंदिर किसी भी क्षण ढह सकता है, ऐसी स्थिति होते हुए भी इस घटना के विषय में प्रसार माध्यम एवं प्रशासन मौन रहने की चर्चा सभी स्थान पर है । प्रशासन की ओर से इस अवैध खुदाई पर कोई कार्रवाई होती हुई दिखाई नहीं देती । इस विषय में पत्रकारों द्वारा प्रश्न उपस्थित किये जाने पर प्रशासन ने केवल इतना कहा कि ‘तहसीलदार को ठेकेदार को नोटिस भेजने के लिये कहेंगे’, किन्तु ठोस कार्रवाई के विषय में टालमटोल की ।

सरकारी हस्तक्षेप की नितांत आवश्यकता ! – ग्रामवासियों का मत

आस-पास के ग्रामवासियों में भी इस विषय को लेकर रोष का वातावरण है । स्थानीयों के कथनानुसार, ‘‘यह खनन कार्य केवल अवैध ही नहीं है, अपितु धर्मान्धों द्वारा मंदिर को लक्ष्य किया जा रहा है । एक ओर पुजारी भयभीत हैं तथा दूसरी ओर प्रशासन मौन है । इस कारण ७० वर्ष प्राचीन मंदिर के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है । यह प्रकरण गंभीर है तथा इसमें सरकारी हस्तक्षेप की नितांत आवश्यकता है ।’’

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