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शबरीमाला मंदिर सोना घोटाले में त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष गिरफ्तार

माकपा से हैं पुराने संबंध!

थिरुवनंतपुरम (केरल): शबरीमाला मंदिर से सोना गायब होने के सनसनीखेज मामले में त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और आयुक्त एन. वासू को विशेष जांच दल (SIT) ने गिरफ्तार किया है। वासू के मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से पुराने और गहरे संबंध रहे हैं। वे कोल्लम पंचायत के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अलावा, वे माकपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पी.के. गुरुदासन के निजी सचिव तथा कानूनी सलाहकार भी रह चुके हैं।

इस गिरफ्तारी पर भाजपा नेता और विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने कहा कि, “एन. वासू की गिरफ्तारी से वरिष्ठ माकपा नेताओं की संलिप्तता उजागर होगी। विशेष जांच दल माकपा नेता और त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पद्मकुमार से भी पूछताछ कर सकता है।”


19 सितंबर

शबरीमला मंदिर की मूर्तियों से ४ किलोग्राम सोना गायब

केरळ उच्च न्यायालय का जांच का आदेश

थिरुवनंतपुरम् (केरळ) – केरळ उच्च न्यायालय ने शबरीमला मंदिर की मूर्तियों पर स्वर्ण का आवरण चढ़ाते समय हुए अनियमितता की जांच के निर्देश दिए हैं । न्यायालय के समक्ष यह तथ्य आया कि वर्ष २०१९ में जब मूर्तियों पर स्वर्ण का आवरण चढ़ाकर उन्हें पुनः मंदिर में लाया गया, तब उनके भार में ४ किलोग्राम स्वर्ण की कमी पाई गई थी । न्यायालय ने मंदिर के मुख्य सतर्कता तथा सुरक्षा अधिकारी, जे त्रावणकोर देवस्वम् बोर्ड के पुलिस अधीक्षक हैं, को इस प्रकरण की विस्तृत जांच करने का आदेश दिया । स्वर्ण की यह कमी मंदिर के द्वारपालक देवताओं की मूर्तियों में पाई गई ।

न्यायालय ने कहा कि वर्ष २०१९ में जब मूर्तियों पर से स्वर्ण का आवरण उतारा गया, तब उनका भार ४२ किलोग्राम ८० ग्राम था; किन्तु चेन्नई स्थित जिनको स्वर्ण का आवरण चढ़वाने का कार्य दिया गया था, वहां भार जांचने पर वह लगभग ४.५४ किलोग्राम कम पाया गया । न्यायालय ने उल्लेख किया कि ४ किलोग्राम ५४१ ग्राम की सीधी कमी स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होती है, जो चिंताजनक विषय है तथा इसकी गहन जांच आवश्यक है । अभिलेखों की जांच कर ३ सप्ताह में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है ।

मूर्तियों में सुधार हेतु न्यायालय की अनुमति ही नहीं ली गई थी !

न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि द्वारपालकों की मूर्तियाँ वर्ष १९९९ में आधिकारिक अनुमति से स्थापित की गई थीं एवं उनकी ४० वर्ष की गारंटी थी । इसके पश्चात केवल ६ वर्ष में ही मूर्तियों में दोष उत्पन्न हो गया तथा उनमें सुधार करना पड़ा । जब त्रावणकोर देवस्वम् बोर्ड ने वर्ष २०१९ में मूर्तियों पर चढें स्वर्णमढ़ित ताम्र आवरण को सुधारने एवं पुनः चढवाने हेतु भेजा, तब विवाद उत्पन्न हुआ । विशेष बात यह रही कि मूर्तियाँ बाहर भेजते समय न तो न्यायालय तथा न ही विशेष आयुक्त की अनुमति ली गई थी ।

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