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देवी चामुंडेश्वरी केवल हिन्दुओं की संपत्ति नहीं हैं – डी.के. शिवकुमार का संतापजनक वक्तव्य

बेंगलुरु (कर्नाटक) : चामुंडेश्वरी केवल हिन्दुओं की संपत्ति नहीं हैं । दशहरा कोई धार्मिक उत्सव नहीं है । वह सांस्कृतिक उत्सव है । (दशहरा यह सनातन धर्म के विजय का प्रतीक है, यह स्मरण रहे ! – संपादक) बानू मुश्ताक ने दशहरे का उद्घाटन किया तो उसमें क्या गलत है , यह संतापजनक प्रश्न उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने किया । मैसूरु दशहरा उद्घाटन के लिए हिन्दूद्वेषी लेखिका बानू मुश्ताक की नियुक्ति का भाजपा ने विरोध किया था, उस पर उन्होंने यह प्रतिक्रिया दी ।

शिवकुमार आगे बोले –

१. चामुंडी टेकडी, चामुंडीदेवी यह सभी धर्मियों की हैं । सभी समाज के लोग चामुंडेश्वरी मंदिर में जाते हैं । यह उनकी श्रद्धा है । हम मस्जिद, चर्च, जैन मंदिर, गुरुद्वारा ,सभी स्थानों पर जाते हैं । गुरुद्वारा जाना गलत है क्या ? तो फिर हिन्दु मंदिर में अन्य धर्मी गए तो उसका विरोध क्यों ?

२. अनेक हिन्दुओं ने इस्लाम अथवा ईसाई धर्म स्वीकार नहीं किया क्या ? (हिन्दुओं का तलवार के बल पर बलपूर्वक धर्मांतरण किया गया, यह इतिहास है । अत्याचारी मुस्लिम आक्रामकों ने हिन्दुओं का धर्मांतरण किया । इसलिए अर्धसत्य बोलकर समाज का बुद्धिभ्रम करने का कुटिल प्रयास करनेवाले डी.के. शिवकुमार का निषेध ! – संपादक) कुछ हिन्दु परंपराएं मुसलमान पालन नहीं करते क्या ? यह सब राजनीति है । तो टेकडी चढने में क्या हानि ? उद्घाटन करने में क्या हानि ? यह प्रतिप्रश्न उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने किया। अयोध्या में केवल हिन्दुओं को ही आना चाहिए, ऐसा कोई नियम है क्या ?

“आप (कांग्रेस वाले) केवल एक ही परिवार को अपना देव मानते हैं !” – सांसद यदुवीर वडेयार

चामुंडी टेकडी सभी धर्म एवं समुदायों हेतु खुली हैं । देवी की पूजा करनेवाले, उस पर विश्वास करनेवाले तथा उसका आदर करनेवाले लोग सभी जाति एवं धर्मों में हैं ; परंतु चामुंडी टेकडी एक शक्तिपीठ है । देवी चामुंडेश्वरी हिन्दुओं की देवी हैं तथा उसका उल्लेख हिन्दू धर्मग्रंथ मार्कंडेय पुराण के ‘देवी माहात्म्य’ में है ; अन्य किसी धर्मग्रंथ में नहीं । यहां प्रतिदिन हिन्दु धर्मशास्त्र के अनुसार पूजा एवं परंपराएं चलती हैं । यहां आनेवाले सभी लोग उन्हें हिन्दु देवी मानकर ही पूजा करते हैं । दशहरा हमारे देश का सबसे बडा सांस्कृतिक उत्सव है । सभी धर्मों के लोग इसमें सम्मिलित हो सकते हैं ; परंतु मूलतः यह हिन्दू पर्व है । इसका दिनांक हिन्दू पंचांगानुसार निश्चित किया जाता है । यह ऐसा पर्व नहीं है, जो किसी की इच्छा अथवा भावना के अनुसार बदल दिया जाए ।

आप एक ही परिवार को अपना देव मानते हैं । ऐसी परिस्थिति में, आप देवी के हिन्दू स्वरूप तथा दशहरे की धार्मिक परंपरा को नकारने का साहस न करें । हम राजनीति नहीं कर रहे हैं । आप लंगूर चाल जैसी राजनीति के लिए हमारे धर्म पर आक्रमण करते हैं, तब हम उसके रक्षण हेतु खडे हुए हैं । ऐसा प्रत्युत्तर मैसूरु के भाजपा सांसद श्री. यदुवीर वडेयार ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया है ।

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