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महाराष्ट्र शासन की कक्षा ४ की पाठ्यपुस्तक में अकबर का उल्लेख अब भी ‘जनकल्याणकारी राजा’

भ्रामक ज्ञान से संशय लाने वाला यह पाठ्यक्रम तुरंत हटाकर, युवा पीढी में राष्ट्रभक्ति का संस्कार करने वाला पाठ्यक्रम महायुति सरकार को तत्काल लागू करना चाहिए ! – सम्पादक, हिन्दुजागृति

मुम्बई : केन्द्र शासन की नवीन शैक्षिक नीति के अंतर्गत एन.सी.ई.आर.टी. की कक्षा ८ की समाजशास्त्र की पाठ्यपुस्तक से अकबर का महिमामंडन हटा दिया गया है, साथ ही औरंगजेब, बाबर, अलाउद्दीन खिलजी जैसे क्रूर मोगलों के अत्याचारों का जो इतिहास कांग्रेस ने छिपाया था, वह भी उजागर किया गया है । परन्तु महाराष्ट्र शासन के पाठ्यक्रम में अब भी अकबर का उल्लेख ‘जनकल्याणकारी राजा’ के रूप में किया गया है । केन्द्र शासन के संशोधित पाठ्यक्रम के अनुसार राज्य शासन को भी क्रूरकर्मी अकबर के महिमामंडन को हटाना अनिवार्य है ।

१. एस.सी.ई.आर.टी. की कक्षा ४ की ‘परिसर अध्ययन – भाग २’ की ‘शिवछत्रपती’ नामक पाठ्यपुस्तक में ‘शिवजन्म से पूर्व का महाराष्ट्र’ नामक पहले पाठ में प्रजा के कल्याण के लिए कार्य करने वाले राजाओं में सम्राट कृष्णदेवराय के साथ-साथ मुगल सम्राट अकबर का भी उल्लेख किया गया है ।

२. इस पाठ के पश्चात दिए गए प्रश्नों में से एक में पूछा गया है — ‘प्रजा के कल्याण हेतु राज्य करने वाले राजाओं के नाम लिखिए ।’ इस कारण विद्यार्थी सम्राट कृष्णदेवराय के साथ क्रूरकर्मी अकबर का नाम भी ‘कल्याणकारी राजा’ के रूप में लिख रहे हैं ।

३. इसके परिणामस्वरूप अकबर द्वारा हिन्दुओं पर किए गए अत्याचारों का वस्तुनिष्ठ इतिहास एवं सत्य सामने आने के स्थान पर विद्यार्थियों को बाल्यावस्था से ही मिथ्या इतिहास सिखाया जा रहा है । इस पाठ्यपुस्तक में कांग्रेस सरकार द्वारा मुगलों के क्रूर इतिहास को छिपाने का प्रयास स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है ।

पाठ्यपुस्तक में समर्थ रामदासस्वामी का श्लोक अपूर्ण

इस पाठ्यपुस्तक के ‘संतों का कार्य’ नामक दूसरे पाठ में महाराष्ट्र के कुछ संतों का विवरण किया है । इसमें समर्थ रामदासस्वामी के विषय में दिए गये विवरण में उनका प्रसिद्ध श्लोक ‘सामर्थ्य है चलने का, जो जो करेगा उसका’ केवल अर्धांश में दिया गया है । ‘परन्तु वहां भगवंत का अधिष्ठान अवश्य चाहिए’ — यह श्लोक का उत्तरार्ध नहीं दिया गया है । इसके कारण रामदासस्वामी के संदेश का पूर्ण अर्थ समझ में नहीं आता । यह पाठ्यपुस्तक कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में वर्ष २०१४ में पहली बार प्रकाशित हुई थी । तत्पश्चात महायुति सरकार के समय सितंबर २०१६ में इसका संशोधित संस्करण तथा सितंबर २०२१ में इसका पुनर्मुद्रण किया गया ।

हिंदूविरोधी डॉ. आ.ह. साळुंखे की इतिहास विषय समिति में नियुक्ति !

इस पाठ्यपुस्तक की इतिहास विषय समिति के अध्यक्ष के रूप में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने हिन्दू धर्म पर निरन्तर अपमानजनक वक्तव्य देने वाले डॉ. आ.ह. साळुंखे की नियुक्ति की थी । इस पाठ्यपुस्तक में छत्रपति शिवाजी महाराज को सर्वधर्मसमभाव वाला दर्शाना तथा मुगलों की क्रूरता को छिपाना — यह सब जानबूझकर किया गया है क्या ? — ऐसा संदेह विशेषज्ञों द्वारा प्रकट किया जा रहा है ।

संशोधित पाठ्यक्रम का कार्य प्रगतिपथ पर ! — शिक्षण विभाग

इस विषय में महाराष्ट्र शासन के विद्यालय के शिक्षण विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि केन्द्र शासन की नवीन शैक्षिक नीति के अनुसार संशोधित पाठ्यक्रम का कार्य प्रगति पर है । जब यह कार्य पूर्ण होगा, तब वह शासन के संकेतस्थल पर प्रकाशित किया जाएगा तथा जनमत के लिए सुझाव मांगे जाएंगे । तत्पश्चात आवश्यक परिवर्तन किए जाएंगे ।

नवीन पाठ्यक्रम में होने वाले परिवर्तनों की सूचना अभी उपलब्ध नहीं — एस.सी.ई.आर.टी.

इस संदर्भ में दैनिक ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि ने एस.सी.ई.आर.टी. के अधिकारियों से संपर्क किया, तब उन्होंने बताया कि नवीन पाठ्यक्रम हेतु केन्द्र शासन से राज्य शासन को दिशा-निर्देश प्राप्त हुए हैं । अतः पाठ्यक्रम में आवश्यक परिवर्तन किए जाएंगे । परन्तु अभी तक किन परिवर्तनों को सम्मिलित किया जाएगा, इस विषय में सूचना उपलब्ध नहीं है ।

राष्ट्रभक्त नागरिकों से आवाहन !

शासन की नवीन शैक्षिक नीति के अनुसार पाठ्यक्रम में भारतीय संस्कृति को प्राथमिकता दी जा रही है । उस दृष्टि से जब नया पाठ्यक्रम प्रस्तुत होगा, तब जनसामान्य से प्रतिक्रियाएं मांगी जाएंगी । परन्तु उससे पूर्व में ही, कांग्रेस शासन में जो मिथ्या इतिहास समाविष्ट किया गया था, वह पाठ्यक्रम से विलोपित हो — इसके लिए एक जागरूक नागरिक के रूप में महाराष्ट्र शासन के शिक्षण विभाग को अवश्य सूचित करें ।

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