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बृहन्मुंबई महानगरपालिका द्वारा गत डेढ वर्ष में सैकडों पशुवधगृहों को दिए गैरकानूनी परमिट

‘भारतीय प्राणी कल्याण मंडल’की शिकायत

  • विमानतलों के १० किमी के परिघ में पशुवधगृहों को अनुमति नहीं !

  • हिन्दू जनजागृति समिति के ‘सुराज्य अभियान’द्वारा केंद्र सरकार से परिवाद !

मुंबई – प्रमुख भारतीय विमानतलों के निकट पक्षियों के टकराने की बढती हुई घटनाएं एवं कर्णावती में हाल ही में हुए विमान अपघात में पक्षी के टकराने के संशय पर हिन्दू जनजागृति समिति ‘सुराज्य अभियान’द्वारा सरकार को निवेदन दिया है । प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय नागरी विमान परिवहन मंत्री को दिए गए निवेदन में ‘विमान नियम १९३७’के ‘नियम ९१’की कठोर कार्यवाही करने की तत्काल मांग की गई है । ‘भारतीय प्राणी कल्याण मंडल’ इस सरकारी संस्था ने हाल ही में जानकारी दी थी कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका द्वारा ‘नियम ९१’का उल्लंघन कर वर्ष २०२४ एवं २०२५ में सैकडों पशुवधगृहों को परमिट दिए गए हैं । मंडल ने उल्लेख किया था कि ये अनधिकृत मांस की दुकानें पक्षियों का आकर्षण हैं । जिससे हवा में विमानों से पक्षियों के टकराने की संभावना बढ जाती है ।

‘विमान नियम १९३७’का ‘नियम ९१’ क्या कहता है ?

‘नियम ९१’के अनुसार किसी भी विमानतल के १० किलोमीटर के परिघ में पशुवधगृह, मांस दुकानें एवं कचरा फेंकने पर मनाही है ।

सुराज्य अभियान द्वारा दिए गए निवेदन के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण सूत्र !

१. सुराज्य अभियान ने यह निवेदन नागरी विमान परिवहन महासंचालनालय, भारतीय विमानतल प्राधिकरण, महाराष्ट्र सरकार, सिडको, नई मुंबई महानगरपालिका, अन्न एवं औषधि प्रशासन, नई मुंबई पुलिस एवं महाराष्ट्र के नगरविकास, गृह एवं पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा ।

२. इसमें नियमों के उल्लंघनों पर प्रकाश डालने की मांग कर विमान परिवहन सुरक्षा की रक्षा करने के लिए एवं सार्वजनिक जीवन की रक्षा करने के लिए शीघ्रतीशीघ्र हस्तक्षेप करने की विनती की गई है ।

३. नागरी विमान परिवहन महासंचालनालय के आकडों के अनुसार, विमान से पक्षी टकराने की घटना वर्ष २०२० में १ सहस्र १५२ से वर्ष २०२१ मेें १ सहस्र ४६६ तक पहुंच गई ।

४. आंतरराष्ट्रीय नागरी विमान परिवहन संगठन ने पक्षियों के टकराने से विमान आस्थापनों ने प्रतिवर्ष १ अब्ज डॉलर्स से अधिक हानि होने का अनुमान बताया है । पक्षियों के टकराने से वर्ष १९८८ से जगभर में २०० से भी अधिक लोगों की मृत्यु हो गई है ।

‘भारतीय प्राणी कल्याण मंडल’के परिवाद (शिकायत) के महत्त्वपूर्ण सूत्र !

‘मत्स्यव्यवसाय, पशुसंवर्धन एवं दुग्धव्यवसाय मंत्रालय’के अंतर्गत आनेवाले ‘भारतीय प्राणी कल्याण मंडल’द्वारा नागरी विमान परिवहन महासंचालनालय, बृहन्मुंबई महानगरपालिका एवं अन्न एवं औषधि प्रशासन विभागों को चेतावनी दी कि अन्न सुरक्षा अधिकारियों द्वारा आवश्यकता होते हुए भी पशुवधगृहों की जांच-पडताल नहीं की गई । इसके साथ ही मंडल ने मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा वर्ष २०१५ के निर्णय का उल्लेख किया । इसके अंतर्गत उच्च न्यायालय ने विमान परिवहन सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करनेवाले अनुज्ञप्तिपत्र (परमिट) निरस्त करने के निर्देश दिए थे । इसके साथ ही एक मानद प्राणी कल्याण अधिकारी के परिवाद के पश्चात पुलिस ने हाल ही में मुंबई विमानतल से केवल ६ से ७.५ किमी की दूरी पर बकरी काटने की दुकान पर छापा मारा ।

सुराज्य अभियान द्वारा सरकार से की गई मांगें !

१. नई मुंबई से आरंभ कर विमानतलों के १० किलोमीटर के परिघ में सभी मांस दुकानें, पशुवधगृह एवं पक्षियों को आकर्षित करनेवाले क्रियाकलाप तुरंत हटाएं ।

२. देशव्यापी अनुपालन पर देखरेख करने के लिए और नियतकालिक ब्याेरा प्रस्तुत करने के लिए नागरी विमान परिवहन मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय देखरेख समिति की स्थापना करें ।

३. भारत के विमान परिवहन सुरक्षा नियमों पर जनता का विश्वास फिर से स्थापित करने के लिए विमानतल संचालकों द्वारा अनुपालन स्थिति ब्योरों का सार्वजनिक प्रकाशन करें ।

४. जो आपत्ति टाली जा सकती हैं उन्हें टालने के लिए ‘नियम ९१’की कठोर कार्यवाही करें ।

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