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सीबीएसई की किताबों में छत्रपति शिवाजी महाराज के लिए सिर्फ 68 शब्द, इतिहास प्रेमियों में आक्रोश

महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने यह घोषणा की है कि, सीबीएसई विद्यालयों के पाठ्यक्रम में छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास को शामिल किया जाएगा, लेकिन वर्तमान में जारी पाठ्यक्रम में उनके बारे में केवल एक पाठ और महज 68 शब्द दिए गए हैं। यह चौंकाने वाला सच अब सामने आया है। इतिहासकार और शिवभक्तों का कहना है कि, सीबीएसई ने मराठों के वैभवशाली इतिहास को जानबूझकर हाशिये पर डालने का कार्य किया है।

क्या महाराज की महिमा केवल 68 शब्दों में है?

मराठों के गौरवशाली इतिहास को महज दो पन्नों में समेट दिया गया है। उसमें छत्रपति शिवाजी महाराज का उल्लेख केवल 11 पंक्तियों में किया गया है, और उसमें भी सिर्फ 68 शब्दों में।

इसका अर्थ है कि, सीबीएसई माध्यम से पढने वाले बच्चों को छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और कर्तृत्व की जानकारी सिर्फ 68 शब्दों में मिलती है, वह भी सूखी और भावनाशून्य भाषा में।

इससे स्पष्ट है कि, ये विद्यार्थी शिवछत्रपति के चरित्र से मिलने वाले भावनात्मक और बौद्धिक ज्ञान से वंचित रह जाते हैं। इसका दीर्घकालीन और गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है, और भविष्य की पीढ़ी इस मिट्टी, इस महान परंपरा और विरासत से धीरे-धीरे दूर होते जा रही है।

राज्य मंडल में है समृद्ध इतिहास

राज्य बोर्ड की चौथी कक्षा की मराठी और अंग्रेज़ी माध्यम की किताबों में छत्रपति शिवाजी महाराज का संपूर्ण इतिहास शामिल है। सातवीं कक्षा की पुस्तकों में 18वीं सदी के मराठा साम्राज्य और समाज सुधारकों के इतिहास का भी समावेश है।

चौथी की किताब के मुखपृष्ठ पर घोड़े पर सवार छत्रपति शिवाजी महाराज का सुंदर चित्र है, और किताब में उनके जीवन के अनेक रोमांचक, प्रेरणादायक और नैतिक मूल्य सिखाने वाले प्रसंगों को समाहित किया गया है।

राज्य में सीबीएसई पैटर्न लागू होने की तैयारी

इस वर्ष से राज्य में सीबीएसई पैटर्न लागू किया जा रहा है। पहले चरण में यह पहली कक्षा से शुरू होकर क्रमशः बारहवीं तक लागू होगा। यह कहा गया है कि, 30% इतिहास राज्य से संबंधित होगा, लेकिन वर्तमान सीबीएसई पाठ्यक्रम की स्थिति देखकर यह स्पष्ट होता है कि आने वाली पीढ़ी को यह बताना कठिन होगा कि, छत्रपति शिवाजी महाराज कौन थे और मराठा साम्राज्य क्या था।

सीबीएसई विद्यालयों के बच्चों को राज्य के प्राचीन दुर्गों, समुद्री किलों और ऐतिहासिक स्थलों के बारे में भी जानकारी नहीं है। कुछ गिने-चुने महापुरुषों को छोडे, तो अन्य महापुरुषों की जयंती या पुण्यतिथि भी वहां नहीं मनाई जाती। इससे यह पीढ़ी देश की संस्कृति से भी दूर होती जा रही है।

इतिहास प्रेमियों और शिवभक्तों में आक्रोश

इन कारणों से इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और शिवभक्तों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। अब सवाल यह उठता है कि, यदि राज्य में सीबीएसई पैटर्न लागू होता है, तो उसमें इतिहास का क्या होगा? सरकार की ओर से कहा गया है कि, छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास विस्तृत रूप में रहेगा। जनता की मांग है कि, इतिहास में छत्रपति के जन्म से लेकर स्वराज्य की स्थापना तक की पूरी गाथा होनी चाहिए।

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