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‘सी.बी.एस्.ई.’की ८ वीं कक्षा की पुस्तक में छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास २२ पृष्ठों में रखा गया !

  • महाराष्ट्र विधान परिषद में आधे घंटे की परिचर्चा

  • ‘एन्.सी.ई.आर्.टी.’का निर्णय

  • १ ली कक्षा से १२ वीं कक्षा तक की प्रत्येक पुस्तक में छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास रखा जाएगा !

  • ‘एन्.सी.ई.आर्.टी.’ का यह उपक्रम प्रशंसनीय है, जिसका निश्चितरूप से बच्चों पर सकारात्मक परिणाम होगा !

नागपुर – राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के (‘‘एन्.सी.ई.आर्.टी.’ के) ‘सी.बी.एस्.ई.’के (‘केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा विभाग’ के) पाठ्यक्रम में पहले छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास केवल ६८ शब्दों में रखा गया था । अब उसे बढाकर उसे २ सहस्र २०० से २ सहस्र ५०० शब्दों में रखा गया है । ८ वीं कक्षा की पुस्तक में ‘राईज ऑफ मराठा’ (मराठों का उदय) इस पाठ में छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास २२ पृष्ठों में रखा गया है । ‘हम यही न रूक कर पहली कक्षा से १२ वीं कक्षा की प्रत्येक पुस्तक में छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास रखने का प्रयास कर रहे हैं’, ऐसा प्रतिपादन राज्य के राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने किया ।

१. विधानपरिषद की ‘आधे घंटे की चर्चा’ में निर्दलीय विधायक सत्यजित तांबे ने ‘सी.बी.एस्. ई.’के पाठ्यक्रम में छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास का लेखन अधुरा होने का विषय रखा ।

२. इस पर राज्यमंत्री डॉ. भोयर ने कहा, ‘‘राज्य सरकार की ओर से छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम से अनेक योजनाएं चलाई जाती हैं । छत्रपति शिवाजी महाराज ने जो ‘आदर्श राजव्यवस्था’ स्थापित की, उसके अनुसार वर्तमान समय में देश के प्रधानमंत्री देश के कामकाज आगे बढाने का प्रयास कर रहे हैं ।’’

३. राष्ट्रवादी कांग्रेस के सदस्य अमोल मिटकरी ने कहा, ‘‘छत्रपति शिवाजी महाराज मूल चरित्र साधन समिति’का अभी भी गठन नहीं किया गया है । सरकारी मुद्रणालय में छत्रपति शिवाजी महाराज के विषय में खंड तैयार नहीं किए गए हैं । यू ट्यूब पर बडी संख्या में धर्मवीर संभाजी महाराज के विषय में अपमानजनक वीडियोज, नाटक, कथा तथा लेखन है, उसे सरकार हटाए ।

४. राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य जयंत आसगांवकर ने कहा, ‘‘क्रमिक पुस्तकों में छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास का विकृतिकरण किया जाता है तथा उसमें पुनः सुधार किया जाता है; परंतु जिसने यह विकृत अथवा अनुचित लेखन किया, उस पर सरकार कार्रवाई करेगी क्या ?’’

५. शिवसेना ठाकरे गुट के सदस्य जगन्नाथ अभ्यंकर ने कहा, ‘‘एन्.सी.ई.आर्.टी.’ के मापदंडों के अनुसार पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय इतिहास ७० प्रतिशत तथा राज्यस्तरीय पाठ्यक्रम ३० प्रतिशत होना चाहिए; परंतु इसमें महाराष्ट्र का ३० प्रतिशत इतिहास अंतर्भूत किया जाना चाहिए ।’’

सन्दर्भ : सनातन प्रभात

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