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विधानसभा और संसद में विधायकों–सांसदों ने ‘हलाल सर्टिफिकेशन’ की आवश्यकता पर गंभीर प्रश्न उठाए

राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु हलाल प्रमाणपत्र पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध की मांग – भाजपा के विधायक मोहन मते

भाजपा के विधायक मोहन मते
भाजपा के विधायक मोहन मते

नागपुर – देश में कुछ निजी इस्लामी संघटनाओं द्वारा चलाए जा रहे अवैध हलाल प्रमाणपत्र के कारण राष्ट्र के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हुआ है । यह अत्यंत गंभीर विषय है । यह व्यवस्था अब केवल वाणिज्य से संबंधित विषय न रहकर भारत की सार्वभौमत्वता (सभी के लिए समानता) को चुनौती देने वाली तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए घोर संकट उत्पन्न करने वाली बन गयी है । अतः उत्तरप्रदेश की भांति ‘हलाल प्रमाणपत्र’ व्यवस्था पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाया जाए, ऐसी मांग भाजपा के विधायक श्री मोहन माटे ने ०९ दिसम्बर को विधानसभा में की । वे औचित्य सूत्र प्रस्तुत करते हुए बोल रहे थे ।

देवस्थान की कृषिभूमि की रक्षा हेतु अवैध भूमि अधिग्रहण विरोधी विधेयक बनाया जाए !

विधायक श्री मोहन मते  ने कहा कि मंदिर परिसर के सरोवर की स्वच्छता तथा उत्सवों के आयोजन के लिए भक्तों को दान के लिए हाथ फैलाने पडते हैं । उनकी स्वामित्व वाली भूमि पर भूमाफिया लाभ कमा रहे हैं । यह छत्रपति शिवाजी महाराज के महाराष्ट्र के लिए शोभनीय नहीं है । अतः देश को धर्माधिष्ठित छत्रपति शिवाजी महाराज की आदर्श-संस्कारयुक्त राष्ट्र की आवश्यकता है । छत्रपति शिवाजी महाराज का आदर्श दृष्टि में रखते हुए देवस्थान तथा उनकी संपत्ती का रक्षण किया जाए । देवस्थानों की सहस्रों एकड कृषिभूमि भूमाफियाओं द्वारा नियंत्रण में लिए (हड़पे) जाने के कारण, उनकी सुरक्षा हेतु गुजरात तथा कर्नाटक राज्य की धारा पर कठोर ‘अवैध भूमि अधिग्रहण विरोधी विधेयक’ तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए तथा विशेष अन्वेषण दल स्थापित किए जाएं, ऐसी मांग उन्होंने इस अवसर पर की ।

सन्दर्भ : सनातन प्रभात


गैर-मांस उत्पादों पर ‘हलाल सर्टिफिकेशन’ की जरूरत नहीं – भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी

03 दिसंबर 2025

नई दिल्ली – राज्यसभा में बुधवार को भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी ने गैर-मांस उत्पादों पर दिए जा रहे हलाल सर्टिफिकेशन को तत्काल वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि यह संविधान की उस मूल भावना के विरुद्ध है, जो हर नागरिक को अपनी आस्था का पालन करने का अधिकार देती है। शून्यकाल के दौरान मुद्दा उठाते हुए कुलकर्णी ने कहा, हलाल की अवधारणा एक विशेष धर्म से जुड़ी है और इसे अन्य धर्मों के लोगों पर थोपना सही नहीं है। यहां तक कि हलाल मीट खाने पर जिन लोगों को आपत्ति है, उनके अधिकारों का भी सम्मान होना चाहिए।

उन्होंने प्रश्न उठाया कि दूध, चीनी, तेल, दवाइयों जैसे गैर-मीट खाद्य पदार्थों और सीमेंट, प्लास्टिक, रसायन जैसी गैर-खाद्य वस्तुओं पर भी हलाल सर्टिफिकेशन क्यों दिया जा रहा है। कुलकर्णी ने कहा, यह तर्कहीन है और शंकाओं से भरा कदम है, जो भारतीय धर्मनिरपेक्षता को कमजोर करता है। भाजपा सांसद ने कहा कि खाद्य वस्तुओं का प्रमाणन केवल भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण को करना चाहिए। धार्मिक संस्थानों या निजी निकायों को सर्टिफिकेशन की अनुमति नहीं होनी चाहिए।

सन्दर्भ : हिंदुस्तान

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