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मुंबई के शिवडी में होगा विवादित ‘सनबर्न फेस्टिवल’, ‘युवाओं पर दुष्प्रभाव’ का है आरोप

१९ से २१ दिसंबर की अवधि में होगा कार्यक्रम : सरकार ने दी अनुमति !

मुंबई : सरकार का लाखों रुपए का राजस्व डूबानेवाला तथा मादक पदार्थाें की भरमार से युक्त ‘सनबर्न फेस्टिवल’का मुंबई के शिवडी में १९ से २१ दिसंबर की अवधि में आयोजन किया गया है । सरकार ने इस कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति दी है ।

वर्ष २०१६ में पुणे में आयोजित ‘सनबर्न फेस्टिवल’में सनबर्न ने सरकार का ४२ लाख ७९ सहस्र ५८३ रुपए का मुद्रांक शुल्क डुबाया था, साथ ही इस कार्यक्रम के लिए मामूली खनिज का अवैध खनन कर उस पर लागू ६० लाख ५२ सहस्र ३८३ रुपए का राजस्व राज्य सरकार अब तक वसूल नहीं कर पाई है । पुणे के सूचना अधिकार कार्यकर्ता श्री. चंद्रकांत वारघडे (पाटिल) द्वारा सूचना के अधिकार अंतर्गत प्राप्त की गई जानकारी से यह बात सामने आई है । केवल इतना ही नहीं, अपितु उस कार्यक्रम के लिए वन विभाग की अनुमति लिए बिना अवैधरूप से २५ से ३० पेड तोडे गए थे तथा उससे भी गंभीर बात यह है कि युवा पीढी को मादक पदार्थाें की खाई में ढकेल देने की इस कार्यक्रम की पृष्ठभूमि रही है । ऐसा होते हुए भी इस कार्यक्रम के लिए लाल कालीन क्यों बिछाई जा रही है ?, यह प्रश्न जागरूक नागरिकों के मन में उठ रहा है । सरकार ने १९ से २१ दिसंबर की अवधि में मुंबई के शिवडी में इस कार्यक्रम की अनुमति दी है ।

पुणे जिले के हवेली तहसील के केसनंद में २८ से ३१ दिसंबर २०१६ की अवधि में ‘सनबर्न फेस्टिवल’ का आयोजन किया गया था । इस कार्यक्रम के लिए सरकारी नियमों को ताक पर बिठाकर मामूली खनिज का खनन किया गया था, साथ ही पेड भी तोडे गए थे । उसके कारण हवेली तहसील कार्यालय ने आयोजकों पर आर्थिक दंड लगाया था ।

सनबर्न महोत्सव स्थाईरूप से प्रतिबंध की मांग !

‘नशाविरोधी संघर्ष अभियान’ की ओर से यह मांग करते हुए कहा गया है कि सनबर्न महोत्सव महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपरा एवं अस्मिता को कलंकित करनेवाला है । उसके कारण समाज में व्यसनाधीनता बढानेवाले ऐसे महोत्सवों पर स्थाईरूप से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए । पुलिस एवं मादक पदार्थविरोधी दल को ऐसे आयोजकों पर निरंतर ध्यान रखना चाहिए । युवा पीढी को मादक पदार्थाें की खाई में ढकेल देनेवाला तथा पाश्चात्त्य विकृतियों की महिमामंडन करनेवाला यह महोत्सव महाराष्ट्र की भूमि में कभी भी नहीं होना चाहिए ।

राजस्व विभाग की भूमिका संदेहजनक !

१५ मार्च २०१७ को शिवसेना उद्धव बाळासाहेब ठाकरे गुट के विधायक सुनील प्रभु एवं भाजपा विधायक भीमराव तापकीर ने यांनी ‘सनबर्न म्युजिक फेस्टिवल’ के ‘परसेप्ट’ इस प्रतिष्ठान से आर्थिक दंड वसूलने के विषय में विधानसभा में तारांकित प्रश्न उठाया था । उस पर तत्कालिन राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने ‘इस प्रतिष्ठान से राजस्व एवं मुद्रांक शुल्क इन्हें मिलाकर १ करोड ३ लाख ३१ सहस्र ९६८ रुपए वसूले जाएंगे’, यह लिखित उत्तर दिया था; परंतु वास्तव में वर्ष २०१९ में तहसील कार्यालय का आर्थिक दंड लगाने का निर्णय प्रांत कार्यालय ने निरस्त किया; परंतु राजस्व विभाग ने इस निर्णय को वरिष्ठ न्यायालय में चुनौती ही नहीं दी । राजस्व विभाग ने ४२ लाख ७९ सहस्र ५८३ रुपए मुद्रांत शुल्क वसूलने के विषय में केवल नोटिस भेजा; परंतु कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की । राजस्व विभाग की इस भूमिका को अत्यंत संदेहास्पद माना जा रहा है ।

सर्वसामान्य लोगों को आर्थिक दंड; परंतु उद्यमियों को संरक्षण देना अन्याय है ! – चंद्रकांत वारघडे (पाटिल), सूचना अधिकार कार्यकर्ता, पुणे
‘कोई सर्वसामान्य किसान अपने खेत में कोई सामान्य खुदाई भी करता है, तब राजस्व विभाग उस पर आर्थिक दंड लगाता है; परंतु सरकार सनबर्न के उद्यमी आयोजकों को संरक्षण दे रही है । मूलतः इसमें सरकार का राजस्व डूब रहा है; परंतु सरकार की ओर से इस पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाती । इसके कारण मुझे शिकायतें करनी पड रही हैं’, ऐसी प्रतिक्रिया सूचना अधिकार कार्यकर्ता चंद्रकांत वारघडे (पाटिल) ने ‘सनातन प्रभात’के प्रतिनिधि से बात करते हुए व्यक्त की ।

‘सनर्बन फेस्टिवल’की विवादित पृष्ठभूमि !

१. वर्ष २००९ के ‘सनबर्न फेस्टिवल’ में नेहा बहुगुणा (आयु २३ वर्ष) एवं वर्ष २०१४ में इशा मंत्री (आयु २७ वर्ष) इन युवतियों की मृत्यु हुई ।

२. वर्ष २०१९ के ‘सनबर्न फेस्टिवल’ के बाहर के परिसर में अति नशा करने से साईप्रसाद एवं वेंकट सत्यनारायण, साथ ही बेंगलुरू (कर्नाटक) के संदीप कोट्टा इनकी मृत्यु होने का आरोप है ।

३. वर्ष २०२४ में मादक पदार्थाें के अतिसेवन के कारण करण कश्यप (आयु २६ वर्ष) की मृत्यु होने का आरोप है ।

४. वर्ष २०१३ के ‘सनबर्न फेस्टिवल’ में मादक पदार्थविरोधी दल ने सौरभ अगरवाल नाम के मादक पदार्थ के बिक्रेता को पकडा । उस समय मादक पदार्थाें के सेवन करनेवाले १ सहस्र से भी अधिक लोगों पर पुलिस ने आर्थिक दंड लगाया था ।

५. वर्ष २०१३ के ‘सनबर्न फेस्टिवल’ के २ दिन पूर्व गोवा में ‘रेप ड्रग’के नाम से जाने जानेवाले ‘केटामीन’की ४५० बोतलें पकडी गईं । इन बोतलों का उस कार्यक्रम में वितरण किया जानेवाला था, यह आरोप है ।

६. वर्ष २००९, २०१४ एवं २०२० में ‘सनबर्न फेस्टिवल’के आयोजकों ने गोवा राज्य का ६ करोड २९ लाख रुपए कर डुबाया है । इस विषय में सितंबर २०२५ में मुंबई उच्च न्यायालय ने ‘सनबर्न फेस्टिवल’ की १ करोड १० लाख रुपए की सुरक्षा आवर्ति धनराशि को जब्त करने का आदेश दिया था ।

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