कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने अल्पसंख्यक प्रतिनिधिमंडल को दिया आश्वासन
कांग्रेस सरकार को पाकिस्तानी शासन क्यों कहा जाता है, यह इसी से स्पष्ट होता है ! क्या अब कर्नाटक के हिन्दुओं के यह ध्यान में आया है कि उन्होंने ऐसी सरकार को मत देकर सत्ता में बिठाकर स्वयं का आत्मघात कर लिया है ? – सम्पादक, हिन्दुजागृति

मंगलूरु (कर्नाटक) – पूर्व की भाजपा सरकार द्वारा लागू किए गए ‘कर्नाटक पशु संरक्षण कानून २०२१ (गोहत्या प्रतिबंध कानून)’ तथा ‘कर्नाटक धर्म स्वतंत्रता संरक्षण कानून २०२१ (धर्मांतरण प्रतिबंध कानून)’ को वापस लेने के संबंध में आगामी बेलगाम अधिवेशन में योग्य कार्रवाई करने का आश्वासन मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने दक्षिण कन्नड जिला कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रतिनिधिमंडल को दिया ।
१. हाल ही में दक्षिण कन्नड जिले में पशुओं के परिवहन के संदर्भ में घटित घटनाओं की पृष्ठभूमि पर दक्षिण कन्नड जिला कांग्रेस की अल्पसंख्यक शाखा के नेताओं तथा जिला कांग्रेस समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के निवासस्थान ‘कावेरी’ पर सिद्धरामय्या से भेंट कर उन्हें निवेदन प्रस्तुत किया ।
२. वर्ष २०२३ के विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में कांग्रेस पक्ष ने सत्ता में आने के एक वर्ष के पूर्व ही इन कानूनों को वापस लेने का आश्वासन दिया था । दिए गए वचन के अनुसार इन दोनों कानूनों को वापस लेने हेतु आगामी बेलगाम अधिवेशन में योग्य कार्रवाई की जाए, ऐसा अनुरोध निवेदन में किया गया है ।
३. इस निवेदन में कहा गया था कि, भाजपा सरकार के गोहत्या प्रतिबंध तथा गोहत्या प्रतिबंधक कानूनों के कारण दक्षिण कन्नड जिले में भय का वातावरण उत्पन्न हो गया है एवं गोतस्करी करने वालों पर पुलिस द्वारा गोलीबारी करना, उनके घर-संपत्ति अधिग्रहित करना, जैसी चिंताजनक घटनाएं घटित हुई हैं । इस ‘काले कानून’ के कारण कृषकों को उनके पशुओं का क्रय-विक्रय (बेच) करना संभव नहीं हो रहा है, ऐसा वातावरण उत्पन्न हो गया है । साथ ही ‘कर्नाटक धर्म संरक्षण कानून’ के नाम पर रा.स्व. संघ परिवार के लोग अल्पसंख्यकों पर निरंतर अत्याचार कर रहे हैं । राज्यघटनानुसार प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी दबाव के बिना अपनी इच्छानुसार धर्म पालन करने का अधिकार होते हुए भी कर्नाटक में धर्मांतरण प्रतिबंधक कानून लागू होना राज्यघटना-विरोधी है, ऐसी शिकायत उन्होंने निवेदन में की है ।








