दानवीर कर्ण

बालमित्रों, कर्ण दुर्योधन का घनिष्ठ मित्र था । वह एक महान दानी के रूप में प्रसिद्ध था । वह अपने पास आए किसी भी याचक को कभी खाली हाथ नहीं लौटाता था, ऐसी उसकी कीर्ति थी । Read more »

ब्राह्मण की दरिद्रता गुरुकृपा से गई !

बालमित्रो, अक्कलकोट के स्वामी समर्थजी भगवान दत्तात्रेय के तीसरे अवतार हैं । उन्होंने अनेक भक्तोंपर कृपा की है । उनमें से एक हैं, आज की कथा के गरीब ब्राह्मण.. Read more »

शिवाजी महाराज की गुरुभेंट

समर्थ रामदास स्वामीजी की ख्याति सुननेपर छ.शिवाजी महाराज को उनके दर्शन की लालसा निर्माण हुई । उनसे मिलने के लिए वे कोंढवळ को गए । वहां भेट होगी इस आशा से सायंकालतक रुके, तब भी महाराज की स्वामीजी से भेंट नहीं हुई । Read more »

टेंबेस्वामी : श्री वासुदेवानंद सरस्वती

इनको श्री टेंबेस्वामीजीके नामसे भी जाना जाता है । इनका वास्तविक नाम वासुदेव था; पिताजीका नाम गणेशभट्ट, माताजीका नाम रमाबाई और दादाजीका नाम हरीभट्ट था । Read more »

गणपति का मारक रूप

बच्चों, आज हम अपने प्यारे गणपति बाप्पा की कथा से परिचित होंगे । हम सब गणपतिजी के तारक रूप से परिचित हैं, जिसमें गणपति का एक हाथ आर्शीवाद देनेवाला एवं करूणामय दृष्टि है । Read more »

पंढरपुरमें पांडुरंगकी मूर्तिकी स्थापना

`‘हे पांडुरंग, आपके चरण समचरण हैं । उनमें द्वैत नहीं है । ऐसे स्वरूपमें आप इन दो इंटोंपर (द्वैतपर) अद्वैत स्वरूपमें खडे हैं ।’’ Read more »