प्रभु ‘श्रीराम’ का नाम लिखे पत्‍थरों का पानी पर तैरना

जिन पत्‍थरों पर श्रीराम लिखा था वह तो तैर गए और प्रभु श्रीरामने जो पत्‍थर पानी में छोडा उसपर श्रीरामका नाम न होने से वह डूब गया । प्रभु श्रीराम से भी बडा उनका नाम है; क्‍योंकि हमारे सामने श्रीरामजी उपस्‍थित न हों; परंतु उनका नाम भक्‍तों को तारता है । Read more »

गुरु के आज्ञापालन का महत्त्व

एक दिन समर्थ रामदास स्‍वामी ने उनके शिष्‍य कल्‍याणस्‍वामी से कहा, ‘एक पेड की टहनी कुएं के ऊपर आ गई है । उस टहनी को उलटी दिशा से तोडना है ।’ इस कथा में देखते है गुरु की आज्ञा का पालन कर कल्‍याणस्‍वामी रामदासस्‍वामी के उत्तम शिष्‍य कैसे बन गए । Read more »

ईश्‍वर का नाम जपनेवालों को काल का डर न होना

यह संसार एक चक्‍की के समान है और भगवान उस खूंटी के समान है । जो भगवान का नामजप करते हुए उनके चरणों में रहते हैं उनको वह कभी पिसने नहीं देते । Read more »

अपने गुरु का दर्द दूर करने के लिए ये शूरवीर शिष्य ले आया था शेरनी का दूध…

समर्थ गुरु रामदास स्वामी अपने शिष्यों में सबसे अधिक प्रेम छत्रपति शिवाजी महाराज से करते थे। शिष्य सोचते थे कि, शिवाजी महाराज राजा होने के कारण ही अधिक प्रिय है। समर्थ स्वामी ने शिष्यों का यह भ्रम दूर करने के बारे में विचार किया। Read more »

बचपन से ही वीर, साहसी वृत्ती रहनेवाले लौहपुरुष सरदार वल्लभभार्इ पटेल !

‘भारत के लौह-पुरुष के नाम से सरदार वल्लभभार्इ पटेल जगप्रसिद्ध हुए । उनका जन्म ३१ अक्टूबर १८७५ को गुजरात के नडियाद गांव में हुआ था । Read more »

संसार को प्रसन्न करना कठिन होना !

लोगों को क्या अच्छा लगता है, इस ओर ध्यान देने की अपेक्षा ईश्वर को क्या अच्छा लगता है, इस ओर ध्यान दीजिए । सर्व संसार को प्रसन्न करना कठिन है, ईश्वर को प्रसन्न करना सरल है । Read more »

ब्रिटीशपूर्व काल में भारत ज्ञानार्जन के, अर्थात शिक्षा के शिखर पर होना

‘भारत की ब्रिटीशपूर्व काल की शिक्षा उत्कर्ष साधनेवाली थी । इस सन्दर्भ में यूरोपियन यात्रियों एवं शासनकर्ताओं के निःसन्दिग्ध साक्ष्य उपलब्ध हैं । रामस्वरूप ने उनके Education System during Pre-BritishPeriod इस प्रबन्ध में इस विषय में चर्चा की है ।’ Read more »

रामराज्य में शिक्षा कैसी थी ?

श्रीराम ने स्वतंत्र शिक्षा देकर घरघर में श्रीराम निर्मित किए थे ! रामराज्य में आर्थिक योजनाओें के साथ ही उच्च कोटिका राष्ट्रीय चरित्र भी निर्मित किया जाता था । उस समय के लोग निर्लाेभी, सत्यवादी, सरल, आस्तिक एवं परिश्रमी थे । आलसी नहीं थे । Read more »

रामराज्य में शिक्षा कैसे प्रदान की जाती थी ?

रामराज्यमें आर्थिक योजनाके साथ ही उच्च राष्ट्रीय चरित्रका निर्माण किया गया था । तत्कालिन लोक निर्लाेभी, सत्यवादी, अलंपट, आाqस्तक और सक्रिय थे; क्रियाशून्य नहीं थे । जब बेकारभत्ता मिलता है तब मनुष्य क्रियाशून्य बनता है । तत्कालिन लोग स्वतन्त्र थे; कारण शिक्षा स्वतन्त्र थी । Read more »

वीर अभिमन्यु

कुरुक्षेत्रमें कौरवोंके रथी-महारथियोंसे अपने प्राणोंको दांवपर लगाकर लडते हुए वीरगतिको प्राप्त होनेवाला अभिमन्यु । अभिमन्युने छोटी अवस्थामें ही अतुलनीय पराक्रम किया था । किसी भी कार्यमें सफल होनेके लिए पराक्रम करना ही पडता है । Read more »