संत निवृत्तीनाथ

संत निवृत्तीनाथ संत ज्ञानेश्वर के बडे भाई तथा गुरु थे । उनके माता-पिता के देहत्याग के बाद सारा भार निवृत्तीनाथपर आया था । निवृत्तीनाथने ज्ञानदेव, सोपानदेव तथा मुक्ताबाई का माता-पिता की तरह ममता से पालन किया । Read more »

श्री गाडगे महाराज (इ.स. १८७६-१९५६)

श्री डेबूजी झिंगराजी उर्फ गाडगे महाराजजी का जन्म विदर्भ के कोते नामक गांव में हुआ था । वे धोबी समाज के थे । गाडगे महाराजने अपनी आयु के आठवें वर्ष से अपने घर की विपन्न/संकटग्रस्त परिस्थिति का, अपने समाज के पिछडेपन का, समाज के अनपढ होने का निरीक्षण किया । Read more »

श्रीपाद श्रीवल्लभ

भगवान दत्तात्रेय के प्रथम अवतार श्रीपाद वल्लभ के विषय में अत्यल्प बातें ज्ञात हैं । इस पार्श्वभूमिपर गणेश चतुर्थी के अवसरपर श्रीपाद श्रीवल्लभ के अलौकिक कार्य तथा उनके इस जन्मक्षेत्र पीठापुरम के संदर्भमें संक्षिप्त ब्यौरा । Read more »

श्री स्वामी समर्थ !

दत्त संप्रदाय में श्रीपाद श्रीवल्लभ तथा नृसिंह सरस्वती दत्तात्रेय के पहले तथा दूसरे अवतार माने जाते हैं । श्री स्वामी समर्थ ही नृसिंह सरस्वती हैं अर्थात दत्तावतार हैं । Read more »

श्री वासुदेवानंद सरस्वती (१८५४-१९१४)

संत वासुदेवानंद सरस्वती श्री टेंब्येस्वामी के नाम से भी पहचाने जाते थे । उनका उपनाम वासुदेव, पिताजी का गणेशभट्ट, एवं माताजी का रमाबाई तथा दादाजी का नाम हरिभट्ट था । Read more »

श्रीवल्लभाचार्य

भक्तिकालीन सगुणधारा की कृष्णभक्ति शाखा के आधारस्तंभ तथा पुष्टिमार्ग के प्रणेता श्रीवल्लभाचार्यजी का जन्म संवत १५३५, वैशाख कृष्ण एकादशी के दिन काशी के निकट दक्षिण भारत के कांकरवाड ग्राम मे हुआ । उन्हें अग्नि का अवतार कहा गया है । वे वेदशास्त्रों में प्रवीण थे । Read more »

संत सावता माली

संत सावता माली संत ज्ञानदेव के समय के एक प्रसिद्ध संत थे । उनका जन्म इ. स. १२५० का है तथा उन्होंने इ. स. १२९५ में देह त्यागी । अरण-भेंड यह सावतोबा का गांव है । सावता माली के दादाजी का नाम देवु माली था, वे पंढरपुर के वारकरी थे । Read more »

संत तुकाराम : भागवत धर्म मंदिर का कलश !

मराठी भक्ति परंपरा में अनन्य साधारण स्थान रखनेवाले संत तुकाराम महाराजने संसार के सर्व सुख-दुःखों का सामना साहस से कर अपनी वृत्ति विठ्ठलचरणों में स्थिर की । भागवत धर्म मंदिर का कलश अर्थात संत तुकाराम महाराज की जानकारी देनेवाला यह लेख … Read more »

श्री माणिक प्रभू

श्री माणिक प्रभू का जन्म निजामशाही के बसव कल्याण के निकट लाडवंती नामक छोटे से गांव में हुआ था । उनका संपूर्ण जीवन विलक्षण चमत्कारों से भरा हुआ दिखाई देता है । Read more »

‘श्रीरामचरितमानस’ के रचियता संत गोस्वामी तुलसीदास

गोस्वामीजी की महानता तथा उनके काव्य के मर्म को समझकर उनका आंकलन करना अत्यंत दुष्कर है; काकभुशुंडीजी श्रीरघुनाथजी के रहस्य (गोस्वामीजी के काव्य के वर्ण्य- विषय) के विषय में बताते हुए कहते हैं । Read more »