दुष्ट वालिका वध

अपनी प्रजा के लिए अपनी पत्नी का भी त्याग करनेवाले प्रभु श्रीराम ने वाली का वधकर सुग्रीव को उसका राज्य किस प्रकार प्राप्त करवाया था, यह आज हम देखेंगे । Read more »

जब माता शबरी ने भगवान श्रीराम को खि‍लाए जूठे बेर . . .

शबरी ने बेरों को चखना आरंभ कर दिया । अच्छे और मीठे बेर वह बिना किसी संकोच के श्रीराम को देने लगी । श्रीराम उसकी सरलता पर मुग्ध थे । उन्होंने बडे प्रेम से जूठे बेर खाए । Read more »

भगवान श्रीराम भवसागर पार करानेवाले खेवनहार !

‘कैकयी को दिया वचन पूरा करने हेतु प्रभु श्रीरामचंद्र अपने भाई लक्ष्मण तथा पत्नी सीता के साथ वनवास जाने को निकले । प्रभु श्रीराम वनवास के मार्गपर गंगा नदीके सम्मुख आए । Read more »

सत्सेवा का महत्त्व !

सेवा का अर्थ है, भगवान को जो अच्छा लगे वह काम करना; भगवान के कार्य में सम्मिलित होना, यही भगवान की सेवा है । यदि हम काम में मां का हाथ बटाएं, तो मां को अच्छा लगेगा या नहीं ? तब मां हमें मिठाई देगी तथा हमें प्यार करेगी । उसी प्रकार हमने भगवान की सेवा की, तो भगवान भी हमें प्यार करेंगे । Read more »