गुणों का महत्‍व

एक राजा था, जिसका नाम रामधन था । उसके राज्‍य का कामकाज आराम से चल रहा था । राजा के नैतिक गुणों के कारण प्रजा भी प्रसन्‍न थी । राजा के राजकुमार का नाम नंदनसिंह था । अत्‍यधिक लाड-प्‍यार ने नंदनसिंह को बिगाड दिया था । वह अत्‍यंत जिद्दी हो गया था । राजा ने उसे गुरु राधागुप्‍त के आश्रम भेज दिया । Read more »

सत्‍यनिष्‍ठ राजा हरिश्‍चंद्र ! 

महाराज त्रिशंकु के पश्‍चात हरिश्‍चंद्र अयोध्‍या के राजा बने । महाराज हरिश्‍चंद्र सत्‍यवादी थे । उन्‍होंने अपने जीवन में कभी झूठ नहीं बोला था । वह बहुत बडे धर्मात्‍मा भी थे । वह अपना वचन पूरा करने के लिए कुछ भी कर सकते थे । सत्‍यवादी और धर्मात्‍मा राजा हरिश्‍चंद्र की कीर्ति चारों ओर फैली हुई थी । इंद्रदेव ने महर्षि विश्‍वामित्र को हरिश्‍चंद्र की परीक्षा लेने के लिए कहा । Read more »

अध्यात्म की पहली सीढी : अहंकार का त्याग !

एक नगर में शूरसेन नाम का एक राजा था । शूरसेन अत्यंत पराक्रमी होने के कारण उसे अपने शौर्य, राज्य, सुख-संपत्ति तथा कर्तापन का अत्यंत अहंकार था । एक दिन शूरसेन को अध्यात्म सीखने की इच्छा हुई । शूरसेन ने अपने प्रधान को बुलाकर राज्य में जो भी अध्यात्म सिखानेवाले सर्वश्रेष्ठ ज्ञानी गुरु है, उनका सम्मान करने और अध्यात्म सिखाने के लिए राजमहल में लाने की आज्ञा दी । Read more »

महाराज रघु का दान ! 

महाराज रघु अयोध्या के सम्राट थे । वे प्रभू श्रीरामजी के परदादा थे । उनके नामसे ही उनके वंश के क्षत्रिय ‘रघुवंशी’ कहे जाते हैं । एक बार महाराज रघु ने एक बडा यज्ञ किया । जब यज्ञ पूरा हो गया तब महाराज ने ब्राह्मणों तथा दीन-दुखियों को अपना सब धन दान कर दिया । उसके बाद वे मिट्टी के बर्तनों से काम चलाने लगे । Read more »

वीर राजकुमार कुवलयाश्‍व !

एक दिन महर्षि गालव राजा शत्रुजीत के पास आए । महर्षि अपने साथ एक दिव्‍य अश्‍व अर्थात घोडा भी लाए थे । महर्षि ने बताया, ‘‘एक दुष्‍ट राक्षस आश्रम में बार बार आता है और आश्रम को भ्रष्‍ट और नष्‍ट करता है । आपका पुत्र ऋतध्‍वज हमें कष्‍ट देनेवाले असुर का नाश करेगा । इसलिए आप अपने राजकुमार को हमारे साथ भेज दीजिए ।’’ Read more »

अपने गुरु का दर्द दूर करने के लिए ये शूरवीर शिष्य ले आया था शेरनी का दूध…

समर्थ गुरु रामदास स्वामी अपने शिष्यों में सबसे अधिक प्रेम छत्रपति शिवाजी महाराज से करते थे। शिष्य सोचते थे कि, शिवाजी महाराज राजा होने के कारण ही अधिक प्रिय है। समर्थ स्वामी ने शिष्यों का यह भ्रम दूर करने के बारे में विचार किया। Read more »

गोरक्षा हेतू सिंह के सामने स्वयं के देह की आहुति देनेवाला हिन्दुओं का पराक्रमी रघुवंशी राजा दिलीप

श्रीराम प्रभु के रघुवंश की यह प्रसिद्ध कथा है । श्रीराम से पहले रघुवंश में एक महान चक्रवर्ती सम्राट दिलीप हुए ! ये गोव्रत का आचरण करते हैं । Read more »

छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन का एक अद्भुत प्रसंग !

शिवाजी महाराजजी की उनके गुरु समर्थ रामदास स्वामी पर दृढ श्रद्धा थी । इसिलिए कठीन प्रसंग मे भगवान उनका रक्षण करते थे । एेसा ही एक प्रसंग प्रस्तुत कथा से देखेंगे । Read more »

अकबर के विरुद्ध धर्मयुद्ध पुकारनेवाले महाराणा प्रताप !

महाराणा प्रताप ने अकबर के साथ तीन बार युद्ध किया । इन तीनों युद्धों में अकबर महाराणा प्रताप को पराजित नहीं कर सका तथा उन्हें पकड भी नहीं सका । उनकी वीरता प्रतीत करनेवाला यह लेख… Read more »

छत्रपति शिवाजी महाराज आज भी चाहिए !

आज देश को युद्ध की सिद्धता करनेवाले, उसके अभ्यास एवं नियोजन का उत्तरदायित्व स्वयंपर लेनेवाले शिवाजी महाराज जैसे वीर राजाेआें की आवश्यकता है । Read more »