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ब्रिटीशपूर्व काल में भारत ज्ञानार्जन के, अर्थात शिक्षा के शिखर पर होना

‘भारत की ब्रिटीशपूर्व काल की शिक्षा उत्कर्ष साधनेवाली थी । इस सन्दर्भ में यूरोपियन यात्रियों एवं शासनकर्ताओं के निःसन्दिग्ध साक्ष्य उपलब्ध हैं । रामस्वरूप ने उनके Education System during Pre-BritishPeriod इस प्रबन्ध में इस विषय में चर्चा की है ।’ Read more »

भारत में मैकाले के आने से पहले ब्रिटेन में अंग्रेजोंद्वारा भारतीय शिक्षाप्रणाली अपनाने का प्रयास

‘वर्गप्रमुख, स्लेट एवं गुटचर्चा इन संकल्पनाओंको आधुनिक शिक्षापद्धतिमें बहुत महत्व दिखाई देता है; परंतु, इन संकल्पनाओंका मूल स्रोत क्या है ? तो सुनिए, यह संकल्पना भारतीयोंकी हैं । १६२३ में, ‘पेट्रो डेला वाले’ इन नामका एक यात्री भारत आया था । उसने यहांकी शिक्षाव्यवस्था देखी । उसके लेखोंमें उपर्युक्त सभी बातोंका वर्णन मिलता है । … Read more

भगवान परशुराम

वैशाख शुक्ल द्वितीया को परशुराम जयंती है । इस उपलक्ष्यमें भगवान परशुरामसे संबंधित जानकारी प्राप्त करते हैं । Read more »

संपूर्ण विश्वके गणितज्ञोंको विस्मयचकित करनेवाला ‘वैदिक गणित’ !

शृंगेरी पीठके शंकराचार्य भारती कृष्णतीर्थने अपरंपार परिश्रम और ध्यान द्वारा `अथर्ववेद’के `सुलभसूत्र’ (गणितसूत्र) परिशिष्टके प्रत्येक अक्षरसे १६ सूत्र प्राप्त किए । Read more »

गुरुत्वाकर्षणका गूढ उजागर करनेवाले भास्कराचार्य !

भास्कराचार्यजीने अपने (दूसरे) ‘सिद्धांतशिरोमणि’ ग्रंथमें गुरुत्वाकर्षणके विषयमें लिखा है कि, ‘पृथ्वी अपने आकाशका पदार्थ स्व-शक्तिसे अपनी ओर खींच लेती हैं । Read more »

हिंदुस्तानका गौरवशाली वैज्ञानिक इतिहास !

हिंदु वेदोंको मान्यता देते हैं और वेदोंमें विज्ञान बताया गया है । केवल सौ वर्षोंमें पृथ्वीको नष्टप्राय बनानेके मार्गपर लानेवाले आधुनिक विज्ञानकी अपेक्षा, अत्यंत प्रगतिशील एवं एक भी समाजविघातक शोध न करनेवाला प्राचीन ‘हिंदु विज्ञान’ था । Read more »

वराहमिहिर

ग्रहोंका वैज्ञनिक दृष्टिसे अध्ययन करनेवाले ५वें शतकके सुप्रसिद्ध भारतीय खगोलशास्त्री वराहमिहिरजीने खगोलशास्त्र, फलज्योतिषविज्ञान आदि विषयोंका गहन अध्ययन किया था । Read more »