झांसी का किला

उत्तर प्रदेश राज्य के झाँसी में बंगरा नामक पहाड़ी पर १६१३ इस्वी में यह दुर्ग ओरछा के बुन्देल राजा बीरसिंह जुदेव ने बनवाया था । २५ वर्षों तक बुंदेलों ने यहाँ राज्य किया उसके बाद इस दुर्ग पर क्रमश मुगलों, मराठों और अंग्रजों का अधिकार रहा । Read more »

मेहरानगढ

मेहरानगढ किला भारत के राजस्थान प्रांत में जोधपुर शहर में स्थित है । पन्द्रहवी शताब्दी का यह विशालकाय किला, पथरीली चट्टान पहाड़ी पर, मैदान से १२५ मीटर ऊँचाई पर स्थित है और आठ द्वारों व अनगिनत बुर्जों से युक्त दस किलोमीटर लंबी ऊँची दीवार से घिरा है । Read more »

ब्रिटीशपूर्व काल में भारत ज्ञानार्जन के, अर्थात शिक्षा के शिखर पर होना

‘भारत की ब्रिटीशपूर्व काल की शिक्षा उत्कर्ष साधनेवाली थी । इस सन्दर्भ में यूरोपियन यात्रियों एवं शासनकर्ताओं के निःसन्दिग्ध साक्ष्य उपलब्ध हैं । रामस्वरूप ने उनके Education System during Pre-BritishPeriod इस प्रबन्ध में इस विषय में चर्चा की है ।’ Read more »

भारत में मैकाले के आने से पहले ब्रिटेन में अंग्रेजोंद्वारा भारतीय शिक्षाप्रणाली अपनाने का प्रयास

‘वर्गप्रमुख, स्लेट एवं गुटचर्चा इन संकल्पनाओंको आधुनिक शिक्षापद्धतिमें बहुत महत्व दिखाई देता है; परंतु, इन संकल्पनाओंका मूल स्रोत क्या है ? तो सुनिए, यह संकल्पना भारतीयोंकी हैं । १६२३ में, ‘पेट्रो डेला वाले’ इन नामका एक यात्री भारत आया था । उसने यहांकी शिक्षाव्यवस्था देखी । उसके लेखोंमें उपर्युक्त सभी बातोंका वर्णन मिलता है । … Read more

रामराज्य में शिक्षा कैसी थी ?

श्रीराम ने स्वतंत्र शिक्षा देकर घरघर में श्रीराम निर्मित किए थे ! रामराज्य में आर्थिक योजनाओें के साथ ही उच्च कोटिका राष्ट्रीय चरित्र भी निर्मित किया जाता था । उस समय के लोग निर्लाेभी, सत्यवादी, सरल, आस्तिक एवं परिश्रमी थे । आलसी नहीं थे । Read more »

रामराज्य में शिक्षा कैसे प्रदान की जाती थी ?

रामराज्यमें आर्थिक योजनाके साथ ही उच्च राष्ट्रीय चरित्रका निर्माण किया गया था । तत्कालिन लोक निर्लाेभी, सत्यवादी, अलंपट, आाqस्तक और सक्रिय थे; क्रियाशून्य नहीं थे । जब बेकारभत्ता मिलता है तब मनुष्य क्रियाशून्य बनता है । तत्कालिन लोग स्वतन्त्र थे; कारण शिक्षा स्वतन्त्र थी । Read more »

भगिनी निवेदिता – भारत के उत्थान कार्य हेतु सर्वस्व का त्याग करनेवाली विवेकानंद शिष्या !

भगिनी निवेदिता वर्ष १८९८ में भारत में आई तथा आयु के ४४ वे वर्ष में उन्होंने इस जगत्का त्याग किया । पारतंत्र के राजनेताओंद्वारा उन्हें कोई भी राज सम्मान प्राप्त नहीं हुआ; किंतु जनसामान्योंद्वारा उनका ‘विवेकानंद कन्या’ इस विशेषण से सम्मान किया गया । Read more »

गोवा मुक्ति अभियान के समय ऋण (कर्जा) लेकर जीवनयापन करनेवाले भाऊसाहब बांदोडकर !

गोवा मुक्ति अभियान मे भाऊसाहेब का बडश योगदान था । स्व. भाऊसाहेब बांदोडकरजी को गोवा मुक्ति अभियान चलाने के लिए बहुत पैसा व्यय करना पडा । उनके विषय में अधिक जानकारी प्रस्तुत लेख से पढेंगें । Read more »

नरवीर उमाजी नाईक : अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध गरजनेवाले वीरपुरुष क्रांतिकारी

जिनकेद्वारा ‘हम चोर नहीं अपितु क्रांतिकारी हैं’ ऐसा कडा संदेश अंग्रेजों को भेजकर एक देशव्यापी क्रांति का स्वप्न देखा गया एेसे महान क्रांतिकारी उमाजी नार्इक का संक्षिप्त इतिहास प्रस्तुत लेख से देखेंगे । Read more »