Due to a software update, our website may be briefly unavailable on Saturday, 18th Jan 2020, from 10.00 AM IST to 11.30 PM IST

होली की पौराणिक कथा

होली त्यौहार मनाने के पिछे हिरण्यकश्यप और उसकी बहन होलिका की कथा अत्यधिक प्रचलित है। यह कथा विस्तार से देखेंगे । Read more »

नारियल पूर्णिमा

नारियल पूर्णिमापर समुद्र के किनारे रहनेवाले लोग वरुणदेव हेतु समुद्र की पूजा कर, उसे नारियल अर्पण करते हैं । इस दिन अर्पित नारियल का फल शुभसूचक होता है एवं सृजनशक्तिका भी प्रतीक माना जाता है । Read more »

गुढीपाडवा

‘इस दिन ब्रह्मदेवने सृष्टि का निर्माण किया । आदर्श जीवनयापन करनेवाले प्रभू श्रीरामद्वारा दुष्ट वाली का वध भी इसी दिन किया गया था ।’ मित्रो, यह इस दिन का महत्त्व है ! हमें भी इस दिन अनिष्ट कृत्यों का विनाश कर आदर्श जीवन का आरंभ करना चाहिए । Read more »

दत्त जयंती

भगवान दत्तात्रेय की उपासना करने का अर्थ उनके समान प्रत्येक मनुष्य एवं वस्तु से सदा सीखना तथा सीखने का निश्चय करना होता है ! दत्त जयंती के निमित्त हम भगवान दत्तात्रेय के विषय में शास्त्रीय ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करेंगे । Read more »

दीपावली

दीपावली अर्थात दीप + आवली । इस दिन सर्वत्र पंक्तिबद्ध दीपक लगाए जाते हैं । दीपावली आनंदी जीवन का प्रारंभ । हम जिस पद्धति से दीपावली मनाते हैं, उससे अन्यों को आनंद हो, ऐसी प्रत्येक कृति करना, यही खरी दीपावली है ! Read more »

दीपावली के निमित्त से सात्त्विक रंगोलियां !

कृष्णतत्त्व की रंगोलि : १३ ते १७ बिंदु लक्ष्मीतत्त्व की रंगोलि : ११ बिंदु ११ रेखाएं संदर्भ : सनातन-निर्मित लघुग्रंथ, ‘सात्त्विकरंगोलियां’

दीपावली में की जानेवाली सात्त्विक एवं धर्माभिमान जागृत करनेवाली कृतियां

मित्रों, दीपावली का त्यौहार मौज मस्ती करने के लिए न होकर अपनी धर्म एवं संस्कृति की रक्षा करने के लिए तथा अन्यों को आनंद देने के लिए है । Read more »

नवरात्रि

हम सब आनंदमय हों और आदर्शमय जीवन व्यतीत करें, इस हेतु ईश्वरने उत्सवों की निर्मिति की है; अपितु वर्तमान में ये सर्व उत्सव शास्त्र के अनुसार एवं योग्य पद्धति से कैसे मनाएं और उसका शास्त्र हमें ज्ञात नहीं, इसलिए त्यौहार एवं उत्सव में अनेक अनुचित प्रकार चल रहे हैं । Read more »

नव वर्ष ३१ दिसंबर को नहीं, अपितु गुढीपाडवा को मनाकर हिंदु संस्कृति की रक्षा करें !

अपनी हिंदू संस्कृति के अनुसार हम संवत्सरारंभपर नववर्ष क्यों मनाते हैं, यह ज्ञात है न ? वह इसलिए कि इस दिन ब्रह्मदेवने सृष्टि की रचना की थी । इसीलिए इस दिन हम नया वर्ष मनाते हैं । Read more »