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संस्कृत भाषा की निर्मिति, व्याप्ति एवं महत्त्व !

आज संस्कृतदिन ! जिस देववाणी संस्कृतने मानव को ईश्वरप्राप्ति का मार्ग दिखाया, उस देववाणी को ही कृतघ्न मानव विशेषतः स्वातंत्र्योत्तर काल में भारत के सर्वपक्षीय राजनेता नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं ।
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वेद : वेदोऽखिलं धर्ममूलम्

वेद अर्थात् प्राचीन भारतीय ज्ञान की नींव । कुल चार वेद हैं और वह है ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद । इन वेदों मे निश्चित रूप से क्या लिखा है, यह कितने लोग जानते हैं ? Read more »

आवश्यकता…संस्कृत सीखने की !

हम भारतीयों के मन में भी अति प्राचीन भारत देश की सांस्कृतिक परंपरा के लिए नितांत आदर है । हमारी संस्कृति का जतन करने हेतु संस्कृत सीखना बहुत आवश्यक है । Read more »

संस्कृत का महत्त्व समझकर उसका लाभ लेनेवाले विदेशी !

संसार के सभी उदात्त विचारों का उगम संस्कृत भाषा में ही है । संस्कृत यह अत्यंत परिपूर्ण, शास्त्रशुद्ध तथा हजारों वर्ष बितनेपर भी जैसी की वैसी जिवित रहनेवाली एकमेव भाषा है ! – पाश्चात्त्य विद्वान तथा विद्यापिठों के अभ्यासक. Read more »

सुभाषिते – २

शैले शैले न माणिक्यं मौक्तिकं न गजे गजे साधवो न हि सर्वत्र चन्दनं न वने वने ।।
अर्थ : हर एक पर्वतपर माणिक नहीं होते, हर एक हाथी में (उसके गंडस्थलमें ) मोती नहीं मिलते साधु सर्वत्र नहीं होते । Read more »

सुभाषित – १

यादृशै: सन्निविशते यादृशांश्चोपसेवते । यादृगिच्छेच्च भवितुं तादृग्भवति पूरूष: ।।
अर्थ : मनुष्य जिस प्रकारके लोगोंके साथ रहता है , जिस प्रकारके लोगोंकी सेवा करता है , जिनके जैसा बनने की इच्छा करता है , वैसा वह होता है ।
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