गुरू क्‍या होते हैं !

हम स्‍वामी विवेकानंदजी और उनके गुरु स्‍वामी रामकृष्‍ण परमहंस जी की कथा के द्वारा ‘गुरु क्‍या होते हैं’ यह समझ लेते हैं । स्‍वामी रामकृष्‍ण परमहंसजी कैंसर रोग से पीडित थे । उन्‍हें खांसी बहुत आती थी और उस कारण वे खाना भी नहीं खा पाते थे । स्‍वामी विवेकानंद जी अपने गुरु जी की हालत से बहुत दु:खी होते थे । Read more »

श्रद्धालु पद्मपादाचार्य !

आदि शंकराचार्यजी जिस गंगातट पर जाते थे, उसके दूसरे किनारे पर एक तेजस्‍वी युवक था। उसके मन में शंकराचार्यजी के प्रति आदर निर्माण हुआ तथा उसने वहीं से उन्‍हें प्रणाम किया । श्रीमत् आदि शंकराचार्यजी ने भी उसका प्रणाम स्‍वीकार किया और उसे अपने हाथ से संकेत कर अपने पास बुलाया । इस कथा में देखते है, उस युवक ने गुरु-आज्ञापालन कैसे किया। Read more »

आज्ञाकारी शिष्‍य !

गुरु नानकजी ने अपने एक शिष्‍य को बुलाकर एक चबूतरा (चौरा) बनाने के लिए कहा । शिष्‍य ने गुरु की आज्ञा से चबूतरा बना दिया । गुरु नानकजी ने उस चबूतरे को देखा और अपने शिष्‍य को उस चबूतरे को तोडने की आज्ञा दी । इस प्रकार गुरु नानकजी अपने शिष्‍य से बार-बार चबूतरा बनाने को कहते और बार-बार तुडवा देते थे । Read more »

गुरु के आज्ञापालन का महत्त्व

एक दिन समर्थ रामदास स्‍वामी ने उनके शिष्‍य कल्‍याणस्‍वामी से कहा, ‘एक पेड की टहनी कुएं के ऊपर आ गई है । उस टहनी को उलटी दिशा से तोडना है ।’ इस कथा में देखते है गुरु की आज्ञा का पालन कर कल्‍याणस्‍वामी रामदासस्‍वामी के उत्तम शिष्‍य कैसे बन गए । Read more »

एकलव्य की गुरुदक्षिणा

एकलव्य ने गुरु द्रोणाचार्य से पूछा, गुरुदेव, क्या आप मुझे धनुर्विद्या सिखाने की कृपा करेंगे ?’’ गुरु द्रोणाचार्य के समक्ष समस्या उत्पन्न हो गई; क्योंकि उन्होंने पितामह भीष्म को वचन दिया था कि केवल राजकुमारों को ही विद्या सिखाएंगे । Read more »

गुरुकृपा प्राप्त करने के लिए स्वभावदोष-निर्मूलन का अनिवार्य होना !

‘स्वभावदोष-निर्मूलन’ अष्टांगसाधना का महत्त्वपूर्ण अंग है । इन स्वभाव दोषों के त्याग के बिना साधक के लिए गुरुकृपा तक पहुंचना असंभव है । साधना में स्वभावदोष-निर्मूलन का महत्त्व निम्नलिखित कथा से ध्यान में आता है । Read more »

गुरु द्रोणाचार्य एवं शिष्य अर्जुन !

शिष्य इतना जिज्ञासू हो कि गुरु का अंतःकरण अभिमान से भर जाए ! इसका उत्तम उदाहरण है अर्जुन ! प्रस्तुत कथा पढकर यह हमे ध्यान में आएगा । Read more »

छत्रपति शिवाजी महाराज की गुरुभक्ति !

छत्रपति शिवाजी महाराज अपने गुरुदेव समर्थ रामदास स्वामी के एकनिष्ठ भक्त थे । यह देख अन्य शिष्यों को लगा, ‘‘शिवाजी के राजा होने से ही समर्थ उनसे अधिक प्रेम करते हैं !’’ समर्थ रामदासस्वामी ने यह भ्रम त्वरित दूर करने का संकल्प लिया । Read more »

स्वामी विवेकानंदजी की अपने गुरु के प्रति नि:स्वार्थ भक्ति दर्शानेवाली प्रेरक कथा !

स्वामी विवेकानंदजी ने देवी जगदंबामाता के पास केवल ‘ज्ञान, भक्ति एवं वैराग्य’ की मांग की थी । यह क्यूं किया, इसका स्पष्टीकरण देते हुए स्वामी विवेकानंदजी कहते हैं, Read more »

शिष्य की परीक्षा

रामानुजाचार्य शठकोपस्वामीजीके शिष्य थे । स्वामीजीने रामानुजजीको ईश्वरप्राप्तिका रहस्य बताया था । परंतु उसे किसीको न बतानेका निर्देश दिया था; किंतु रामानुजजीने अपने गुरुकी इस आज्ञाको नहीं माना.. Read more »