प्राकृतिक आपदाओं के कारण

‘क्रिया के विरुद्ध प्रतिक्रिया’, यह प्राकृतिक अटल नियम है । आज प्रकृति प्रतिशोध ले रही है । मानव, प्रकृति का अविभाज्य अंग है । अतः, उसके लिए प्रकृतिपर आक्रमण कर पाना असंभव है । Read more »

प्लास्टिक का प्रयोग, विनाश को निमन्त्रण

वैज्ञानिकोंने जंगमुक्त, हलकी तथा टिकाऊ वस्तु, ‘प्लास्टिक’ का निर्माण तो कर दिया; किन्तु सबसे बडी समस्या यह है कि इसके कूडे का विघटन नहीं होता । इससे प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है । Read more »

जलप्रदूषण अर्थात नदियोंपर अत्याचार !

मानवने पर्यावरण मे हस्तक्षेप कर के पृथ्वी का संतुलन बिघाड दिया है । इसी का एक हिस्सा है जलप्रदूषण । मानव से होनेवाले नदियोंपर अत्याचार प्रस्तुत लेख से हम देखेंगे । Read more »

पर्यावरण

अपने आसपास का वातावरण अर्थात् पर्यावरण ! पर्यावरण में प्रकृतिद्वारा संतुलित की जाती है । पर्यावरण मनुष्य का हस्तक्षेप बढने से, उसी प्रकार उसकी स्वार्थी एवं नियोजनशून्य वृत्ति के कारण संतुलन बिगड जाता है । Read more »

पर्यावरण की हानि किस कारण ?

यह सब आज आधुनिकता के प्रभाव से हो रहा है । आज प्रत्येक मनुष्य में विषय वासनाओं के अत्याधिक प्रभाव के कारण तथा सत्य के ज्ञान का अभाव होने से मानव जीवन में अनावश्यक विकृतियां जन्म ले रही हैं, उन्हें ही ‘पाप’ कहते है। Read more »

ध्वनिप्रदूषण

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में दूसरे को शांति से जीने के अधिकार की निश्चिंतता अंतर्भूत है । आपके विचार सुनने के लिए ध्वनिक्षेपक की अनिवार्यता आप नहीं कर सकते । Read more »

जलप्रदूषण

बढती लोकसंख्या के कारण घरेलू, गंदापानीr, साबुनयुक्त, तेलयुक्त, सेंद्रीय-असेंद्रीय पदार्थ ऐसे प्रकार के पानी बडे प्रमाण में नदियां, नालोंद्वारा सीधे समुद्र में आते हैं । Read more »