समर्थ रामदास स्वामी के शिष्य छत्रपति शिवाजी महाराज मुगलों से लड रहे थे । शूरवीर महाराज से खुलकर युद्ध करने में असमर्थ मुगलों ने अघोरी विद्या का प्रयोगकर महाराज की एकांत में हत्या करने का षडयंत्र रचा । एक मुगल किसी तंत्र-मंत्र के बलपर पहरा देनेवाले सैनिकों की दृष्टि बचाकर विघ्न-बाधा पार कर शिवाजी महाराज जहां आराम कर रहे थे, उस दालान में पहुंचा । म्यान से तलवार निकालकर महाराजपर वार करने ही वाला था कि किसी अदृश्य शक्ति ने उसका हाथ पकड लिया । उस मुुगल को लगा कि ‘मैं सभी की दृष्टि से बचकर जादू-टोने की विद्या के बलपर यहांतक पहुंचने में तो सफल हो गया; परंतु अब ऐन समयपर मुझे कौन रोक रहा है ?’ उसे तुरंत उत्तर मिला, ‘रक्षकों से बचाकर तुम्हारा इष्ट तुम्हें यहांतक ले आया, तो महाराज का इष्ट भी महाराज को बचाने के लिए उपस्थित है ।’
महाराज का इष्टदेव उस मुगल के इष्टदेव से अधिक सात्विक था;इसलिए शत्रु का दुष्ट संकल्प विफल हुआ । शिवाजी महाराज का रक्षण हुआ ।
संदर्भ : मासिक ‘ऋषीप्रसाद’, जुलाई २००२
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