ब्रिटीशपूर्व काल में भारत ज्ञानार्जन के, अर्थात शिक्षा के शिखर पर होना

‘भारत की ब्रिटीशपूर्व काल की शिक्षा उत्कर्ष साधनेवाली थी । इस सन्दर्भ में यूरोपियन यात्रियों एवं शासनकर्ताओं के निःसन्दिग्ध साक्ष्य उपलब्ध हैं । रामस्वरूप ने उनके Education System during Pre-BritishPeriod इस प्रबन्ध में इस विषय में चर्चा की है ।’ Read more »

युवको, ‘फ्रेंडशिप डे’ समान पाश्‍चात्त्य विकृति पर बलि न चढे !

अगस्त माह के प्रथम रविवार को युवा वर्गद्वारा ‘फ्रेंडशिप डे’ मनाया जाता है । क्या वास्तव में कोई एक बैंड बांधकर मैत्री में वृद्धि होती है ? Read more »

राष्ट्र एवं धर्म से दूर जा रहे विद्यार्थी बंधुओं को अब भारत माता की रक्षा के तत्पर होना आवश्यक है ।

आज हमारे भारत देश में हो रहे अनुचित प्रकार एवं घटनाआे का हमें अंतर्मुख होकर विचार करने की आवश्यकता है । इसी विषय को लेकर प्रस्तुत यह लेख… Read more »

मित्रो, हिन्दू संस्कृति के अनुसार वस्त्र परिधान करें !

हम फैशन और परिवर्तन के नामपर हमारी संस्कृति के सात्त्विक वस्त्र पहनना भूल गए है । इसलिए आइए, हम प्रतिदिन हमारे संस्कृति के अनुसार सात्त्विक वेशभूषा करने का निश्‍चय करें । Read more »

बच्चो, अपने सद्गुणों की सहायता से शिक्षा व्यवस्था के दुष्परिणामों को मातकर गुणसंपन्न बनें !

छात्रो, आज हम जिस शिक्षा व्यवस्था से शिक्षा ठाहण कर रहे है, वह व्यवस्था संपूर्ण रूप से केवल ‘परीक्षा पद्धति’ है ! विद्यार्थी को कितने प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं, उसपर उस बालक की गुणवत्ता उच्च अथवा निम्न सिद्ध होती है । Read more »

छत्रपति शिवाजी महाराज का आदर्श रखकर उसके अनुसार कृति करना, ही खरी शिवजयंती !

शिवजयंती मनाना, अर्थात केवल शौर्यगीत बजाना अथवा किसी गाने का कार्यक्रम करना यहीं तक मर्यादित है क्या ? खरे अर्थों में शिवजयंती मनाना, अर्थात शिवाजी महाराज के गुण आत्मसात करने का निश्चय करना है । Read more »

बच्चों के जीवन में खेल एवं मनोरंजन का स्थान

बच्चे एवं बडे, दोनों के ही जीवन में खेल का महत्त्व है । प्राचीन काल से तत्कालीन संस्कृति में खेल का उल्लेख पाया जाता है । Read more »

बच्चों में स्थित हिंसा तथा राष्ट्रवाद

अत्यंत निराशा के कारण बच्चे हिंसाचार की ओर मुड रहे हैं । परीक्षा के माध्यम से गुणवत्ता को सिद्ध करते हुए उच्चतम स्थान तक पहुंचने की आतंकी प्रतियोगिता, यह निराशा का बडा कारण है । Read more »

बच्चो, चलो पाठ्य पुस्तक में होनेवाली प्रतिज्ञाओं को आचरण में लाएं !

प्रतिज्ञाओं को आचरण में लाने से बच्चों में राष्ट्राभिमान उत्पन्न होकर उनका राष्ट्र एवं संस्कृति की रक्षा हेतु सिद्ध होना | Read more »

आयुर्वेद अर्थात प्राचीन ऋषिमुनियों की अनमोल देन !

अपने शरीर तथा मन को स्वस्थ रखना प्रत्येक मनुष्य का धर्म है ।इस हेतु आयुर्वेद प्राचीन कालसे उपयोग में लाया हुआ परिणामकारा माध्यम है ।
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