गंगास्नान से पावन होने के लिए तीर्थयात्रियों में खरा भाव आवश्यक !

काशी में एक बडे तपस्वी शान्ताश्रम स्वामी का ब्रह्मचैतन्य गोंदवलेकर महाराज से निम्नांकित सम्भाषण प्रस्तुत कथा से हम देखेंगे | Read more »

संत सखू

संत सखू का ईश्वर के प्रति जो अपार भक्तिभाव था और उनसे मिलने की जो तीव्र लगन थी यह देखकर स्वयं ईश्वर ही उससे मिलने आए । उसके मुख में सदैव श्रीविठ्ठल का ही नाम रहता था । Read more »

सन्त ज्ञानेश्वर आैर चांगदेव महाराज

चांगदेव महाराज सिद्धि के बलपर १४०० वर्ष जीए थे । चांगदेव को उनके सिद्धि का गर्व था । यह गर्व सन्त ज्ञानेश्वर महाराजजी ने कैंसे दूर किया, इस कथा से देखेंगे । Read more »

समर्थ रामदासस्वामी की क्षात्रवृत्ति दर्शानेवाली कथा

संत ईश्वर के केवल तारक रूप की नहीं, मारक रूप की भी साधना करते हैं । अत्याचार का दयालु संत भी प्रतिकार करते हैं, मूकदर्शक नहीं होते । यह बोध प्रस्तुत कथा से देखेंगे । Read more »

मृत्यु को लौटानेवाली सिद्धि का मूल्य भी आत्मज्ञान के आगे शून्य होना ।

सिद्धि का उपयोग आत्मज्ञान प्राप्त करने के मार्ग की रुकावट कैसे है यह संत ज्ञानेश्वर एवं चांगदेव इनकी इस कथा से हम देखेंगे । Read more »

गुरु का कार्य है शिष्य को उसका वास्तविक स्वरूप दिखाना !

गुरु की कृपा होनेपर किसी का भय नहीं रहता । आप कौन हैं और आपका स्वरूप क्या है, यह सर्व आपको गुरु दिखाएंगे । यह बोध हमे प्रस्तुत कथा से मिलेगा । Read more »

भक्त दामाजीपंत

भक्त दामाजी भगवान पांडुरंग के निस्सीम भक्त थे । राज्य मे आया संकट दूर करने के लि्ए उन्होने सम्राट से पूछे बिना गोदाम से धान लोगों मे बाटा । यह बात राजा को पता चलने के बाद पांडुरंग के अपने भक्त का कैसे रक्षण किया यह इस कथा से देखेंगे । Read more »

समर्थ रामदासस्वामी का नारायण से राष्ट्रीय संत समर्थ रामदास स्वामी तक की विलक्षण यात्रा

भारत संतों की भूमि है । ऐसा होते हुए भी राष्ट्रहित के लिए कार्य करनेवाले संतों की संख्या बहुत कम है । उनमें से एक अर्थात समर्थ रामदास स्वामी ! उनके बचपन में घटे कुछ प्रसंग एवं उनकी साधना की यात्रा के बारे में यहां संक्षेप में दे रहे हैं । Read more »