रामराज्य में शिक्षा कैसी थी ?

श्रीराम ने स्वतंत्र शिक्षा देकर घरघर में श्रीराम निर्मित किए थे ! रामराज्य में आर्थिक योजनाओें के साथ ही उच्च कोटिका राष्ट्रीय चरित्र भी निर्मित किया जाता था । उस समय के लोग निर्लाेभी, सत्यवादी, सरल, आस्तिक एवं परिश्रमी थे । आलसी नहीं थे । Read more »

रामराज्य में शिक्षा कैसे प्रदान की जाती थी ?

रामराज्यमें आर्थिक योजनाके साथ ही उच्च राष्ट्रीय चरित्रका निर्माण किया गया था । तत्कालिन लोक निर्लाेभी, सत्यवादी, अलंपट, आाqस्तक और सक्रिय थे; क्रियाशून्य नहीं थे । जब बेकारभत्ता मिलता है तब मनुष्य क्रियाशून्य बनता है । तत्कालिन लोग स्वतन्त्र थे; कारण शिक्षा स्वतन्त्र थी । Read more »

छत्रपती शिवाजी महाराज जैसा आदर्श राजा बनाना ही खरा शिवराज्याभिषेक दिन !

विद्यार्थी मित्रो, ज्येष्ठ शु. त्रयोदशी, कलियुग वर्ष ५११५ को शिवराज्याभिषेक दिन है । आज के शासकों की मानसिकता देखकर हमें ज्ञात होगा कि आज छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे राजा की आवश्यकता क्यों है । शिवाजी महाराज जैसे राजा के कारण ही राष्ट्र की, धर्म की एवं हमारी भी रक्षा होगी । Read more »

रणरागिनी महारानी दुर्गावती

गोंडवाना को स्वतंत्र करने हेतु जिसने प्राणांतिक युद्ध किया और जिसके रुधिर की प्रत्येक बूंद में गोंडवाना के स्वतंत्रता की लालसा थी, वह रणरागिनी थी महारानी दुर्गावती । उनका इतिहास हमें नित्य प्रेरणादायी है । Read more »

बुंदेल केसरी महाराजा छत्रसाल

मध्यकालीन भारत में विदेशी आतताइयों से सतत संघर्ष करने वालों में छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप और बुंदेल केसरी छत्रसाल के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं । बुंदेल केसरी छत्रसाल को ‘शत्रु और संघर्ष’ ही विरासत में मिले थे । Read more »

मराठा साम्राज्य का भय संपूर्ण हिन्दुस्तान में निर्माण करनेवाले ज्येष्ठ बाजीराव पेशवे

ज्येष्ठ बाजीराव पेशवा (अगस्त १८, १६९९ – अपै्रल २५, १७४०) मराठा साम्राज्य के चौथे छत्रपति शाहू महाराज के १७२० से आजीवन पेशवा (मराठों के प्रधान मंत्रियों की उपाधि) थे । Read more »

मेवाड़ का अपराजित राजा महाराणा प्रताप

राजपूताने की वह पावन बलिदान-भूमि, विश्व में इतना पवित्र बलिदान स्थल कोई नहीं । इतिहास के पृष्ठ रंगे हैं उस शौर्य एवं तेज़ की भव्य गाथा से । Read more »

साहसी पृथ्वीसिंह

एक बार सम्राट औरंगजेबने एक बहुत बडे बाघ को पकडा । अगले दिन उसने घमंड से राजसभा में पूछा, ‘‘ऐसा बाघ आपमें से किसीने कभी देखा है क्या ?’’ मुगलों की दास्यता विवशता से स्वीकारनेवाले जोधपुर के राणा Read more »

भारतीय इतिहास के दो प्रसिद्ध राजा : हरिहर और बुक्कराय

दक्षिण भारत में धूम मचानेवाले मुगल आक्रमकों को निस्तेज कर के ‘शंकराचार्य विद्दारण्य स्वामीजी’के मार्गदर्शन के अनुसार स्वतंत्र विजयनगर के साम्राज्य की स्थापना करनेवाले हरिहर और बुक्कराय ये भारत के इतिहास के प्रसिद्ध राजा हैं । Read more »

मेवाड के सिसोदिया राजवंश के शूरवीर राजपूत राजा : बाप्पा रावळ एवं राणासंग

मेवाडकी भूमिपर रचा गया इतिहास एवं चितौड, उदयपुर, हल्दी घाटी ये धर्मक्षेत्र अपनी तेजस्वी परंपराके कारण चिरकाल तक अमर रहेंगे, उनकी इतनी महत्ता है । Read more »