संसार को प्रसन्न करना कठिन होना !

लोगों को क्या अच्छा लगता है, इस ओर ध्यान देने की अपेक्षा ईश्वर को क्या अच्छा लगता है, इस ओर ध्यान दीजिए । सर्व संसार को प्रसन्न करना कठिन है, ईश्वर को प्रसन्न करना सरल है । Read more »

देशद्रोही को पाठ पढानेवाली वीरमति !

‘चौदहवीं शताब्दी में देवगिरी राज्यपर राजा रामदेव राज्य करते थे । मुसलमान सम्राट (बादशाह) अल्लाउद्दीन ने देवगिरीपर आक्रमण किया तथा राजा को आत्मसमर्पण करने हेतु कहा; परन्तु पराक्रमी रामदेव ने उसे धिक्कारा । Read more »

समुद्र मंथन एवं राहू

जनमेजय राजा ने ऋषि वैशंपायन को समुद्र मंथन की कथा सुनाने की विनती की । इसलिए वे कथा सुनाने लगे – राजा, प्राचीनकाल में देव और दैत्यों ने समुद्र मंथन कर अमृत तथा अन्य रत्नों को निकालने का निश्चय किया । Read more »

कक्षीवान की पहेली

एक बार कक्षीवान ऋषि प्रियमेध ऋषि के पास गए तथा बोले, `प्रियमेध, मेरी एक पहेली सुलझाओ । ऐसी कौन-सी वस्तु है जिसे जलानेपर प्रकाश नहीं उत्पन्न होता ?’ Read more »

सत्यकाम जाबाल

प्राचीनकाल में उत्तरी हिन्दुस्थान में जाबाला नाम की एक निर्धन दासी रहती थी । उसका सत्यकाम नाम का एक पुत्र था । जाबाला दिनभर कडा परिश्रम कर अपना तथा अपने प्रिय पुत्र का पेट भरती थी । Read more »

समर्पण

एक साधु द्वार-द्वार घूमकर भिक्षा मांग रहा था । वृद्ध तथा दुर्बल उस साधु को ठीक से नहीं दिखाई देता था । वह एक मन्दिर के सामने खडा होकर भिक्षा मांगने लगा । Read more »