पाश्चात्त्य अंकगणितकी अपेक्षा कई गुना प्रगत, प्राचीन हिंदु अंकगणित !

७ मई – विश्व गणित दिनके निमित्तसे…

एक ‘ट्रिलियन’ का अर्थ क्या है ? इसमें एकपर कितने शून्य होते हैं ? ठहरिए ! ठहरिए ! सहस्र, करोड अथवा सौ अरब, ऐसा एककका प्रयोग कर न बताएं । भारतीय दशमान पद्धतिका प्रयोग कर अथवा मराठी शब्दका प्रयोग कर बताएं । विचार कीजिए । कुछ आ रहा है ? नहीं आ रहा है न ! तो फिर एकपर पचास शून्य अथवा एकपर छियानवे शून्योंका अर्थ क्या है, यह बताना भी संभव नहीं होगा । फिर ऐसी संख्याओंका उच्चार भी कैंसेकरें ? परंतु भारतीय अंकगणितमें इसका उत्तर है ।

१. संख्याएं, वर्तमान दशमान पद्धतिकी जनक

अतिप्राचीन भारतमें गणितपर विपुल शोध किया गया । इस विषयमें विश्वकोशमें दी जानकारीके अनुसार, प्राचीन कालके भारतियोंद्वारा गणितके लिए प्रयुक्त चिह्नोंको ‘अंक’कहा गया है । ये संख्याएं अर्थात (१ से ९ और ०) वर्तमानकी दशमान पद्धतिके जनक हैं । आर्यभट्टने शून्यका शोध लगाया । शून्य, भारतद्वारा विश्वको प्रदान एक देन है ।

२. दशमान पद्धतिकी संकल्पना

‘आसा' नामक वैदिक कालखंडके प्रारंभमें वायव्य भारतमें रहनेवाले भारतीय गणित विशेषज्ञोंने सर्वप्रथम दशमान पद्धतिकी संकल्पना प्रस्तुत की । संख्याके स्थानानुसार उसके मूल्यमें परिवर्तन होगा । ‘आसा' द्वारा प्रस्तुत इस संकल्पनाके माध्यमसे ही विश्वको संख्यालेखनकी दशमान पद्धतिकी देन प्राप्त हुई । इस पद्धतिसे लिखी संख्याएं ‘हिंदासा’ नामसे जानी जाने लगी । साधारणतः वर्ष ५०० में आर्यभट्टने दशमान पद्धति सर्वत्र प्रस्थापित की । उन्होंने शून्यके लिए ‘ख' शब्दका प्रयोग किया । तदुपरांत उसे ‘शून्य’ नामसे संबोधित किया गया ।

३. भारतीय पद्धतिमें दसके सतरहवे
घात तककी संख्याएं अस्तित्वमें होना

अंग्रेजीमें संख्याओंको क्रमानुसार संज्ञाएं नहीं हैं । ‘थाऊजंड’, ‘मिलियन’, ‘बिलियन’, ‘ट्रिलियन’, ‘क्वाड्रिलियन’ ऐसी एक सहस्रोंकी गुनामें होनेवाली संख्याओंको ही संज्ञाएं हैं । भारतीय पद्धतिमें दसके सतरहवे घात तककी संख्याएं अनेक बार सुनाई पडती हैं, उदा. खर्व, निखर्व, पद्म, महापद्मसे लेकर परार्धतक भी, अर्थात हम केवल नाम ही सुनते हैं । इसके अनुसार निश्चित संख्या बता पाना संभव नहीं होता; कारण उसका हमें अभ्यास ही नहीं है ।

४.भारतीय दशमान पद्धतिनुसार संख्याएं

विविध कोशोंमें अथवा ग्रंथोंमें भारतीय दशमान पद्धतिनुसार निम्न प्रकारसे संख्याएं लिखी जाती हैं ।

१ एक
१० दस
१०० सौ
१००० सहस्र
१०,००० दश सहस्र
१,००,००० लक्ष
१०,००,००० दश लक्ष
१,००,००,००० करोड
१०,००,००,००० दश करोड
१,००,००,००,००० अरब
१०,००,००,००,००० खर्व (दश अरब)
१,००,००,००,००,००० निखर्व
१०,००,००,००,००,००० पद्म
१,००,००,००,००,००,००० दशपद्म
१,००,००,००,००,००,००,०० नील
१०,००,००,००,००,००,००,०० दशनील
१०,००,००,००,००,००,००,००० शंख
१,००,००,००,००,००,००,००,००० दशशंख

५. एकपर छियानवे शून्योंसे युक्त संख्या – दशअनंत !

अब इसके आगेकी कौनसी संख्या होगी, क्या यह बता पाएंगे ? प्रयत्न कीजिए । एकपर छियानवे शून्य अर्थात दशअनंत; परंतु इसे नापेंगे कैंसे? भारतीय पद्धतिमें इसका भी उत्तर है । अर्थात ये शब्द आज उपयोगमें नहीं हैं । इन शब्दोंकी सूची किसी भी ग्रंथमें आज उपलब्ध नहीं है । कुछ पुराने ग्रंथोंमें इनके संदर्भ हैं ।

ऐसे ही एक ग्रंथमें उपलब्ध सूची देखें ।

एकं (एक), दशं (दस), शतम् (सौ), सहस्र (हजार), दशसहस्र (दस हजार), लक्ष (लाख), दशलक्ष, करोड, दशकरोड, अरब, दशअरब, खर्व, दशखर्व, पद्म, दशपद्म, नील, दशनील, शंख, दशशंख, क्षिती, दश क्षिती, क्षोभ, दशक्षोभ, ऋद्धी, दशऋद्धी, सिद्धी, दशसिद्धी, निधी, दशनिधी, क्षोणी, दशक्षोणी, कल्प, दशकल्प, त्राही, दशत्राही, ब्रह्मांड, दशब्रह्मांड, रुद्र, दशरुद्र, ताल, दशताल, भार, दशभार, बुरुज, दशबुरुज, घंटा, दशघंटा, मील, दशमील, पचूर, दशपचूर, लय, दशलय, फार, दशफार, अषार, दशअषार, वट, दशवट, गिरी, दशगिरी, मन, दशमन, वव, दशवव, शंकू, दशशंकू, बाप, दशबाप, बल, दशबल, झार, दशझार, भार, दशभीर, वज्र, दशवज्र, लोट, दशलोट, नजे, दशनजे, पट, दशपट, तमे, दशतमे, डंभ, दशडंभ,कैक, दशकैक, अमित, दशअमित, गोल, दशगोल, परिमित, दशपरिमित, अनंत, दशअनंत.’

संदर्भ : सकाळ, २४ अप्रैल २०१०.