रक्षाबंधन

रक्षाबंधन (Rakshabandhan)

रक्षाबंधन (Rakshabandhan)

रक्षाबंधन

१. हिंदू संस्कृति में कुटुंब को विशेष महत्त्व है !

१ अ. हिंदू संस्कृति में कुटुंब संस्था हमें आदर्श जीवन जीने का पाठ पढाती है : मित्रो, हमारी हिंदू संस्कृति में अनेक पारिवारिक नाते हैं। इन नातेदारों के कारण ही आज हम सभी माला में बंधे मोतियोंसमान प्रेम के नातों में बंधे हैं । इन पारिवारिक नातों के कारण ही प्रत्येक परिवार आनंदमय एवं सुखमय जीवन जीता है ।

१ आ. पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण से पारिवारिक प्रेम नष्ट होने का भय निर्मित होना : हमारी हिंदू संस्कृति में पारिवारिक नातों को बहुत ही संजोकर रखा जाता है । हमारे यहां पति, पत्नी, मामा, चाचा, चाची, मौसी ऐसे अनेक नाते हैं । मित्रो, यह पारिवारिक नाते नहीं होते, तो हम आदर्श जीवन जी पाते क्या ? यही संबंध हमें आदर्श जीवन जीने का पाठ पढाते हैं; परंतु पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकुरण से पारिवारिक नातों का प्रेम नष्ट हो जाएगा इसकी चिंता होती है । आजकल हम देखते हैं कि किसीको किसी के विषय में प्रेम एवं अपनापन ही नहीं है ।

१ इ. नातों को संभालना एवं उन्हें संजोना, अर्थात हमारी हिंदू संस्कृति का रक्षण करना : मित्रो, अपने भाई को अच्छे अंक मिलनेपर हम सभी को आनंद से बताते हैं। हमारे पिताजी हमारे लिए नवीन वस्तु लेकर आएं, तो हम उसे सभी को दिखाते हैं। इससे हमें यह ध्यान में आएगा कि नातों के कारण हमारे जीवन में छोटी छोटी बातो का हम आनंद ले सकते हैं। नातों को संभालना एवं उन्हे संजोए रखना, अर्थात हिंदू संस्कृति का रक्षण करना है ।

तो मित्रो, हम वैसा करेंगे ना !

१ र्इ. हिंदू संस्कृति में रक्षाबंधन के त्यौहार के कारण ‘बहन-भाई’के नाते का संवर्धन होना : मित्रो, रक्षाबंधन का त्यौहार ‘बहन-भाई’के नाते का संवर्धन करता है । बहन एवं भाई के नाते का बहुत महत्व है । इस दिन बहन भाई को राखी बांधती है । इससे उनके प्रेम में वृदि्ध होती है । राखी बांधनेवाली बहन की रक्षा करने का दायित्व भाई का होता है ।

१ उ. रक्षाबंधन से इस नाते का पवित्र बंधन में रूपांतर होना : जब कोई लडकी अथवा स्त्री किसी लडके को अथवा पुरुष को राखी बांधती है, उस क्षण ही वह उसकी बहन हो जाती है । हमारे त्यौहार कितने महान है न ! एक रक्षाबंधन से नाते का पवित्र बंधन में रूपांतर होता है।

१ ऊ. हमारे त्यौहारों का महत्व न जानने का दुष्परिणाम : आज हमारा दुर्भाग्य ऐसा है कि जिन दिनों का कोई महत्व नहीं है, उन्हें हम अंधों के समान मनाते हैं। आज के बच्चों को रक्षाबंधन का महत्व ज्ञात न होने के कारण वे पश्चात्यों के ‘फ्रेंडशिप डे’, ‘रोज डे’, ‘वेलेंटाईन डे’ जैसे निरर्थक एवं अर्थहीन ‘डे’ (दिन) मनाते हैं। मित्रो मुझे बताओ, यह ‘डे’ मनाने से समाज में कौन से पवित्र नाते निर्माण होते हैं ? समाज को इससे क्या लाभ होता है ? उलटे हानि ही होती है ।

मित्रो, तो हम यह ‘डे’ क्यों मनाएं ? आप उन्हें नहीं मनाएंगे ना ? रक्षाबंधन के दिन हम प्रणलेंगें, ‘हम पाश्चात्यों के निरर्थक ‘डे’ नहीं मनाएंगे !’

१ ए. रक्षाबंधन अर्थात दिनांदिन स्त्रियोंपर बढनेवाले अत्याचारों को रोकने के लिए प्रण करने का दिन ! : मित्रो, हम प्रतिदिन समाचारपत्र में स्त्रियोंपर हो रहे अत्याचारों के समाचार पढते हैं। समाज की यह विकृती हमें नष्ट करनी हो, तो प्रत्येक पुरुष को ‘इस राष्ट्र की प्रत्येक स्त्री मेरी बहन है एवं उसकी रक्षा करना, मेरा परम कर्तव्य है’, ऐसा निश्चय करना चाहिए । उससे आगे से समाज में स्त्रियोंपर होनेवाले अत्याचार निश्चित ही रुकेंगे । यही खरा रक्षाबंधन होगा !

मित्रो, हम ऐसा निश्चय करेंगे ना ?

– श्री. राजेंद्र पावसकर (गुरुजी), पनवेल.